चीन में अफ्रीकन स्वाइन फीवर के नए स्ट्रेन से 1000 सुअर संक्रमित हुए

बीजिंग । चीन में इस समय अफ्रीकन स्वाइन फीवर का नया स्ट्रेन सामने आया है। इस नए स्ट्रेन ने चीन के सुअरों को बड़ी संख्या में संक्रमित कर दिया है। चीन दुनिया में सुअर के मांस का सबसे बड़ा विक्रेता है। हेल्थ और मार्केट एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि इस बीमारी के आने से चीन को बड़े नुकसान की आशंका है। 
चीन की चौथी सबसे बड़ी पोर्क (सुअर मांस) विक्रेता कंपनी न्यू होप लिउही ने कहा है कि उसके 1000 सुअरों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर के दो नए स्ट्रेन मिले हैं। कंपनी की चीफ साइंस ऑफिसर यान झिचुन ने कहा कि इस फीवर के संक्रमण की वजह से सुअर बेतरतीब तरीके से मोटे हो रहे हैं। 
यान झिचुन ने बताया कि इन दोनों स्ट्रेन्स की वजह से अफ्रीकन स्वाइन फीवर से संक्रमित सुअर मर नहीं रहे हैं। ये उस तरह का फीवर नहीं है जो साल 2018 और 2019 चीन में फैला था, लेकिन इसकी वजह से एक खास तरह की क्रोनिक कंडिशन पैदा हो रही है जिसकी वजह से जो सुअर के बच्चे पैदा हो रहे हैं वे कमजोर हो रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि ये बिना लाइसेंस वाली वैक्सीन सुअरों को लगाने की वजह से हुआ है। 
न्यू होप की तरह कई पोर्क उत्पादक कंपनियों ने इस बीमारी से ग्रसित कुछ सुअरों को हाल ही में मारा है, ताकि ये फीवर बाकी सुअरों को संक्रमित न कर सके। हालांकि, अभी ये संक्रमण सीमित है लेकिन इसका नए स्ट्रेन के तेजी से फैलने की खबरें आ रही हैं। इससे फीवर से पोर्क उत्पादक इसलिए भी डरे हुए हैं क्योंकि दो साल पहले 40 करोड़ सुअरों में से करीब आधे को खत्म कर दिया था।
यान ने बताया कि कोरोना काल में चीन में खाने-पीने की सुरक्षा को लेकर नियम काफी सख्त कर दिए गए हैं। इसलिए सुअरों की सेहत पर भी ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। वैसे भी इस समय चीन में पोर्क की कीमत आसमान छू रही हैं। यान कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि यह फीवर कैसे चीन के सुअरों को संक्रमित कर रहा है, लेकिन फिलहाल यह चिंताजनक स्थिति है। बीजिंग के जीव विज्ञानी वाएन जॉनसन कहते हैं कि उन्होंने पिछले साल सुअरों में क्रोनिक लेकिन कम जानलेवा बीमारी की देखी थी। इसके वायरस में कुछ जेनेटिक कंपोनेंट्स कम थे। इसे एमजीएफ360 कहा जाता है। 
न्यू होप के सुअरों में जो स्ट्रेन मिला है उसमें एमजीएफ360 और सीडी2वी जीन गायब हैं। कुछ रिसर्च में यह भी सामने आया है कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर के वायरस से एमजीएफ360 जीन हटा देने से वैक्सीन के खिलाफ इम्यूनिटी आ जाती है। यह जीन कैसे हटे यह किसी रिसर्चर को नहीं पता है। इसकी वैक्सीन इसलिए नहीं बनाई गई, क्योंकि जीन हटने से यह आगे चलकर ज्यादा संक्रामक और जानलेवा हो सकता था। नैरोबी के इंटरनेशनल लाइवस्टॉक रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएलआरआई) की प्रिंसिपल साइंटिस्ट लूसिला स्टेना कहती हैं कि इस बीमारी के वायरस की जीनोम सिक्वेंसिंग करके उसमें ये एमजीएफ360 जीन को सक्रिय कर भी देते हैं तो भी इससे कोई फायदा नहीं होगा। 
 

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