थोड़ी देर में करतारपुर कॉरिडोर पर भारत-पाक के बीच वार्ता, बैठक के लिए अटारी बॉर्डर पहुंचा भारतीय प्रतिनिधिमंडल

अमृतसर। करतारपुर कॉरिडोर को लेकर आज एकबार फिर भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच बातचीत होनी है। वाघा (पाकिस्तान) में करतारपुर कॉरिडोर पर अपने पाकिस्तानी समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठक करने के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल अटारी सीमा पर पहुंचा गया है। भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों की करतारपुर कॉरिडोर और संबंधित तकनीकी मुद्दों के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने के लिए मुलाकात होनी है। यह बैठक आज सुबह करीब 9.30 बजे वाघा(पाकिस्तान) बॉर्डर पर होने वाली है।बैठक में पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ. मोहम्मद फैसल की अध्यक्षता में 20 पाकिस्तानी अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा।

भारत के दबाव के आगे झुका पाकिस्तान
करतारपुर कॉरिडोर को लेकर रविवार को होने वाली वार्ता से पहले पाकिस्तान ने भारतीय दबाव में 10 सदस्यीय पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (पीएसजीपीसी) से एक खालिस्तान समर्थक को हटा दिया, लेकिन यहां भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया और उसने उसमें दूसरे खालिस्तान समर्थक को शामिल कर लिया। करतारपुर कॉरिडोर की गतिविधियों में पीएसजीपीसी समन्वयक की भूमिका निभाने वाली है। लिहाजा भारत ने इसमें खालिस्तान समर्थक तत्वों की उपस्थिति पर आपत्ति व्यक्त की थी। कॉरिडोर को लेकर वाघा में रविवार को दोनों देशों के अधिकारियों के बीच दूसरे दौर की बातचीत होनी है। इससे पहले पाकिस्तान ने शनिवार को पीएसजीपीसी से खालिस्तान समर्थक गोपाल सिंह चावला को हटाने की घोषणा करते हुए नई कमेटी की घोषणा की।

मालूम हो कि करतारपुर पर दोनों देशों के अधिकारियों बीच रविवार को होने वाली बातचीत पहले दो अप्रैल को होनी थी। बैठक में इस बात पर चर्चा होनी है कि कौन-कौन से श्रद्धालु करतारपुर में गुरुद्वारा दरबार साहिब जा सकेंगे, कॉरिडोर में श्रद्धालुओं की आवाजाही कैसे होगी, कौन-कौन से दस्तावेज आवश्यक होंगे और क्या यह वीजा मुक्त होगा। साथ ही श्रद्धालुओं की सुगम, सुरक्षित व निर्बाध आवाजाही के लिए सुविधाओं पर भी विचार किया जाएगा।

करतारपुर साहिब: कब क्या हुआ ?
1522 : श्री गुरु नानक देव जी ने गुरुद्वारे की स्थापना की और एक किसान की तरह जिंदगी बिताने का निर्णय किया।
1539: श्री गुरु नानक देव जी ने देह का त्याग कर गुरु अंगद देव को उत्तराधिकारी बनाया।
1947: विभाजन के दौरान गुरदासपुर जिला भी दो हिस्सों में बंट गया और गरुद्वारा करतारपुर साहिब पाकिस्तान चला गया।
1971: पाकिस्तान के नारोवाल और भारत के गुरदासपुर को जोडऩे वाला रावी नदी पर बना पुल भारत-पाक युद्ध में तबाह हो गया।

कॉरिडोर पर बातचीत में क्या होंगे प्रमुख मुद्दे ?
चर्चा में उठाए जाने वाले मुख्य बिंदुओं में से एक क्रीक क्षेत्र में पाकिस्तान द्वारा पुल के निर्माण की भारत की मांग होगी। पाकिस्तानी सीमा पर तटबंध से भरी सड़क के निर्माण से डेरा बाबा नानक की संभावित बाढ़ को लेकर भारत ने चिंता जताई है। हालांकि भारत पहले से ही करतारपुर गलियारे के लिए सभी मौसम की कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए अपनी तरफ से एक पुल का निर्माण कर रहा है, इसने पाकिस्तान से अपनी तरफ से इसी तरह का पुल बनाने का आग्रह किया है। क्योंकि यह तीर्थयात्रियों को सुरक्षित और सुरक्षित आवागमन प्रदान करेगा जबकि चिंताओं को भी संबोधित करेगा।बैठक में अन्य प्रमुख मुद्दों में तीर्थयात्रियों की संख्या होगी जो पूरे वर्ष तीर्थयात्रियों के गलियारे, सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही तक पहुंचने की अनुमति देंगे, चाहे वे व्यक्तियों या समूहों के रूप में यात्रा करेंगे, और चाहे वे परिवहन या पैदल यात्रा करें।

करतारपुर कॉरिडोर में भारत का सहयोग
करतारपुर कॉरिडोर बनाने के लिए भारत 500 करोड़ रुपये खर्च करेगा। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए और अन्य अवसरों पर 10,000 तीर्थयात्रियों को पूरा करने के लिए और हर दिन 5000 तीर्थयात्रियों को पूरा करने के लिए एक ऑल वेदर सुविधा बनाने के लिए उच्च तकनीक सुरक्षा और निगरानी प्रणाली स्थापित करने पर, अन्य चीजों के अलावा, पैसा खर्च किया जाएगा।

करतारपुर कॉरिडोर क्यों जरूरी ?
भारत-पाकिस्तान सीमा के साथ करतारपुर मार्ग पंजाब में गुरदासपुर से तीन किलोमीटर दूर है। एक बार खुलने के बाद यह सिख तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान के करतारपुर में ऐतिहासिक गुरुद्वारा दरबार साहिब तक सीधी पहुंच की अनुमति देगा, जहां गुरु नानक देव का 1539 में निधन हो गया था। सूत्रों ने कहा कि करतारपुर गलियारे (Kartarpur Corridor) पर काम 31 अक्टूबर तक पूरा होने की उम्मीद है, जो गुरु नानक देव की 550वीं जयंती से पहले है।

कब-कब हुई करतारपुर पर बातचीत ?
करतारपुर कॉरिडोर पर पहले दौर की बातचीत 14 मार्च 2019 को अटारी-वाघा सीमा के भारतीय हिस्से अटारी में आयोजित हुई थी, इस बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच ड्राफ्ट समझौते को अंतिम रूप देने के मुद्दों पर चर्चा की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोबारा चुने जाने के बाद गलियारे पर दूसरे दौर की वार्ता की घोषणा की गई।

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