दिल्ली के तीनों नगर निगमों का कार्यकाल समाप्त

दिल्ली नगर निगम अधिनियम के तहत राजधानी के तीनों नगर निगमों का कार्यकाल गुरूवार को समाप्त हो गया। ऐसे में महापौर, सदन और स्थायी समिति समेत तमाम समितियों के अध्यक्ष अब संबंधित समिति की बैठक नहीं कर सकेंगे। कोई भी पार्षद किसी भी तरह के विधायी व वित्तीय कार्य की सिफारिश नहीं करेगा। हालांकि, पांच साल पहले गठित होने के दिन 18 मई या इससे भी पहले निगम भंग होने तक पार्षद अपने पद पर आसीन रह सकेंगे। डीएमसी एक्ट की धारा दो (67) के तहत एक अप्रैल को नया वित्तीय वर्ष शुरू होता है। 2017 में गठित तीनों नगर निगमों के पांचों वित्तीय वर्ष गुरूवार को समाप्त हो गए हैं। 

तीनों नगर निगमों के सचिव कार्यालय ने विधायी पक्ष का कार्यकाल समाप्त होने और उनकी ओर से बैठकें करने के संबंध में पहले ली गई कानूनी राय की प्रतियां फाइलों से निकाल ली है। उसकी ओर से शुक्रवार को महापौर और सभी समितियों के अध्यक्षों को कानूनी राय के बारे में अवगत कराया जाएगा। उनको बताया जाएगा कि उनकी नगर निगम के कार्यालय के पांच वर्ष हो चुके है। एक्ट की धारा 35 के अनुसार नगर निगम के लिए प्रत्येक वर्ष अपनी प्रथम बैठक में महापौर का चुनाव कराना आवश्यक है। इस कारण तीनों नगर निगम के पांचों साल के दौरान महापौर का चुनाव हो चुका है। लिहाजा अब तीनों नगर निगमों के सदन की बैठक नहीं हो सकेगी, क्योंकि छटे साल महापौर का चुनाव कराने का कोई प्रावधान नहीं है।

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