दिल्ली में आतिशबाजी से 144 लोग झुलसे

दिल्ली आतिशबाजी में झुलसने की घटनाएं इस बार ज्यादा हुई है। इस वजह से आतिशबाजी दीये में झुलसकर दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में करीब 144 मरीज इलाज के लिए पहुंचे, जो पिछली बार से ज्यादा है। इनमें से ज्यादातर मरीज आतिशबाजी में झुलसे हैं। गंभीर रूप से जले हुए 29 मरीज एम्स, सफदरजंग अस्पताल सहित अलगअलग पांच अस्पतालों में भर्ती हैं। जिसमें ज्यादातर बच्चे हैं। इनमें से कईयों की आंखों में आतिशबाजी से चोट लगी है। इस वजह से आंख की रोशनी जाने का खतरा है।

आंखों में चोट के कारण 18 मरीज एम्स के आरपी सेंटर में भर्ती किए गए हैं। वहीं सफदरजंग, आरएमएल, लोकनायक गुरु नानक नेत्र चिकित्सालय में 11 बच्चे भर्ती हैं। पिछले साल दीवाली के दिन आतिशबाजी दीये से झुलसकर दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में 68 मरीज इलाज के लिए पहुंचे थे। इस लिहाजा से इस बार आतिशबाजी दीये में झुलसने के मामले करीब दोगुने सामने आए हैं। सफदरजंग अस्पताल में दीवाली से एक दिन पहले ही आतिशबाजी में झुलसकर इलाज के लिए मरीज पहुंचने लगे थे।

इसलिए दो दिन में सफदरजंग अस्पताल में कुल 62 मरीज पहुंचे। जिसमें 53 दिल्ली के रहने वाले नौ दिल्ली से बाहर के रहने वाले हैं। सफदरजंग अस्पताल के बर्न प्लास्टिक के विभागाध्यक्ष डा. शलभ कुमार ने कहा कि इस बार दीवाली के दिन आतिशबाजी दीये से झुलसकर 50 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। जिसमें से 43 मरीज कम जले हुए थे। ओपीडी में इलाज के बाद दवा देकर उन्हें वापस घर भेज दिया गया। सात बच्चे भर्ती किए गए हैं। इनमें से छह लड़कियां एक लड़का शामिल है।

इनमें से चार मरीजों की उम्र 12 साल से कम है और तीन की उम्र 12 साल से अधिक हैं। पांच बच्चों की सर्जरी भी करनी पड़ी। पिछले साल दीवाली के दिन सिर्फ 28 लोग झुलसकर आए थे। लिहाजा, इस बार 78.57 फीसद अधिक मरीज देखे गए और बर्न इमरजेंसी में बहुत व्यस्तता रही। आरएमएल अस्पताल के बर्न विभाग के विभागाध्यक्ष डा. मनोज झा ने कहा कि अस्पताल में आतिशबाजी दीये से जलकर 23 मरीज आए। इसमें दो बच्चे अधिक झुलस गए हैं। एक बच्चा 30 फीसद दूसरा बच्चा 20 फीसद जला हुआ है। इसलिए दोनों बच्चों को भर्ती करना पड़ा है। इसके अलावा जीटीबी में 18 मरीज पहुंचे, जिन्हें इलाज के बाद घर भेज दिया गया। लोकनायक अस्पताल में एक बच्चे को भर्ती किया गया है। वहीं गुरु नानक नेत्र चिकित्सालय में एक अन्य बच्चे को भर्ती किया गया है। क्योंकि आतिशबाजी में उसकी आंख को नुकसान पहुंचा है।

18 मरीजों की आंखों की एम्स में हुई सर्जरी

एम्स के आरपी सेंटर की इमरजेंसी में आंखों की चोट के कारण 33 मरीज पहुंचे। उनमें से 18 लोगों की आंखों में गंभीर चोट होने के कारण भर्ती किया गया है और उनकी आंखों की सर्जरी की गई है। मरीजों की उम्र सात साल से लेकर 36 साल के बीच है। इनमें से ज्यादा 12 साल की उम्र के बच्चे हैं। इनमें लड़के ज्यादा हैं और लड़कियों की संख्या कम है। आरपी सेंटर के प्रमुख डा. जेएस तितियाल ने कहा कि जिन मरीजों की सर्जरी हुई है, उनकी आंखों की रोशनी पर असर जरूर पड़ेगा। कुछ लोगों की रोशनी जा भी सकती है। पिछले साल कोरोना के कारण आतिशबाजी से आंखों में चोट के मामले ना के बराबर थे। इस बार मामले ज्यादा देखे गए हैं।

 

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