दुष्कर्म नाबालिक पीडि़त की प्रेगनेंसी को टर्मिनेट करने हाई कोर्ट ने कलेक्टर व सिम्स डीन को दिया आदेश  

 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय ने एक नाबालिग लड़की की प्रेगनेंसी को टर्मिनेट करने हेतु तुरंत संज्ञान लेते हुए कलेक्टर बिलासपुर, डीन सिम्स को आदेश दिए। इस मामले की आज यानी की 16 मार्च को सुनवाई शुरू हुई। नाबालिग पीडि़ता ने अधिवक्ता प्रतीक शर्मा, रजनी पांडेय, प्रकृति जैन, नीशांत भानुशाली के माध्यम से अपना प्रेग्नेंसी टर्मिनेट करवाने हेतु उच्च न्यायालय में याचिका लगवाई है, जिसमें टर्मिनेशन ऑफ प्रैग्नैंसी अधिनियम की धारा 3 व नियम 9 के अनुरूप बलात्कार पीडि़ता को प्रेगनेंसी टर्मिनेट कराने का अधिकार दिया गया है।
उच्चतम न्यायालय ने विस्तृत आदेश भी ऐसे मामलों के संदर्भ में पारित किया है, जिसमे मेडिकल रिपोर्ट, पीडि़ता के कंसेंट और मामले की परिस्थितियों व पीडि़ता के सम्पूर्ण हित को ध्यान में रखकर उच्चतम न्यायालय द्वारा आदेश पारित किया गया है। सम्पूर्ण मामले की सुनवाई के पश्चात उच्चतम न्यायालय के न्यायदृष्टांत, कानून एवं मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उच्च न्यायालय ने पीडि़ता की प्रेगनेंसी सिम्स बिलासपुर में टर्मिनेट करने का आदेश जारी किया और बलात्कार पीडि़ता की देखभाल और डिस्चार्ज के बाद घर तक पंहुचाने की व्यवस्था करने का आदेश कलेक्टर बिलासपुर को दिया है, साथ ही बलात्कार पीडि़ता होने के कारण डीएनए टिश्यू सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।
 

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