दो चुपचाप गुजर गए, लेकिन अगले 100 सालों में धरती से टकरा सकते हैं 900 क्षुद्र ग्रह

नई दिल्ली । धरती पर बिना कोई नुकसान पहुंचाए शनिवार को 2000 क्यूडब्ल्यू7 और 2010 सी01 नामक दो क्षुद्र ग्रह धरती के पास से गुजर गए। नासा के मुताबिक, इनका आकार दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा जितना बड़ा था। यह संकट तो टल गया, लेकिन यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने अगले 100 सालों में 900 क्षुद्र ग्रहों के धरती से टकराने की आशंका जताई है।
वैज्ञानिकों ने बताया इनमें से छोटे से छोटा ग्रह भी धरती पर भारी तबाही मचा सकता है। ऐसे में धरती से टकराव के जोखिमों को कम करने के लिए यूरोपीयन स्पेस एजेंसी और कई अन्य समूह मिलकर इन क्षुद्र ग्रहों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारियां जुटाने में लग गए हैं। ताकि क्षुद्र ग्रहों से धरती को बचाने की योजना बनाई जा सके है। धरती को बचाने की चिंता में रोम में दुनियाभर के वैज्ञानिकों की एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में डार्ट अंतरिक्षयान को धरती की ओर बढ़ते क्षुद्र ग्रहसे टकराने पर चर्चा की गई। दरअसल, नासा के योजना फ्रिज के आकार के डार्ट अंतरिक्षयान को गोली की रफ्तार से नौ गुना तेजी से एक अंतरिक्ष चट्टान से टकराने की है, ताकि वह अपने रास्ते से भटक जाए। डार्ट दरअसल ‘डबल एस्ट्रॉयड रिडॉयरेक्शन टेस्ट’ है।
फिलहाल यह मिशन सिर्फ एक परीक्षण है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में इसका प्रयोग खतरनाक क्षुद्र ग्रहों को पृथ्वी की तरफ बढ़ने से रोकने में किया जा सकेगा। नासा ने इस मिशन को अनुमोदित कर दिया है। डार्ट का लक्ष्य एक ऐसा क्षुद्र ग्रह है, जो 2022 में पृथ्वी के नजदीक से गुजरेगा और दो वर्ष बाद वापस आएगा। यह दरअसल, डिडिमोस नामक दो क्षुद्र ग्रह हैं।
इनमें से डिडिमोस ए बड़ा और डिडिमोस बी छोटा है। नासा डिडिमोस बी को अपनी दिशा से भटकाने की कोशिश करेगा। यह छोटी चट्टान सिर्फ 160 मीटर चौड़ी है। अगले हफ्ते वैज्ञानिक म्यूनिख में 2006 क्यूवी89 नामक क्षुद्र ग्रह पर चर्चा करने के लिए मिलने वाले हैं, जो 9 सितंबर को पृथ्वी के पास से गुजर गया। फिर, 16 और 17 सितंबर को यूरोपीयन एजेंसी द्वारा जर्मनी के डर्मस्टाड में एक आपातकालीन प्रतिक्रिया कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा, जिसमें जर्मनी, स्विट्जरलैंड और अमेरिका सहित छह देशों की नागरिक सुरक्षा एजेंसियां मौजूद होंगी। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने अधिकांश क्षुद्र ग्रहों की खोज की है, जो आकार में लगभग एक किलोमीटर जितने चौड़े हैं, लेकिन वैज्ञानिकों के निशाने में 140 मीटर चौड़े क्षुद्र ग्रह ही हैं, क्योंकि उनके टकराने पर धरती को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
