दो परिवारों के बीच जुड़े रिश्ते चलते हैं कई पीढ़ियों तक 

इन्दौर । परिचय सम्मेलन जैसे आयोजन वैश्य घटकों को एकजुट करने में सशक्त माध्यम साबित हुए हैं। दो परिवार जुड़ते हैं तो ऐसे रिश्ते कई पीढियों तक चलते हैं। ऐसे मंच एक-दूसरे को जानने, परखने और समझने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। देश में कुछ वर्षो पहले तक वैश्य समाज की शक्ति अलग-अलग खेमों में बटी हुई थी लेकिन अब सभी वैश्य घटकों को एक मंच पर लाने के प्रयासों का नतीजा है कि वैश्य समाज उत्साही और ऊर्जावान नजर आने लगा है। देश के 22 राज्यों और दुनिया के 10 देशों में अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के चेप्टर खुल गए है। इंदौर में वैश्य समाज के चतुर्थ अ.भा. परिचय सम्मेलन में साढ़े आठ हजार प्रविष्ठियों का नया कीर्तिमान बना है जिसके लिए यहां के आयोजक और सभी वैश्य घटक अभिनंदन के हकदार हैं।
स्कीम-71 रिंगरोड स्थित दस्तूर गार्डन पर म.प्र. वैश्य महासम्मेलन की मेजबानी में हो रहे दो दिवसीय अ.भा. वैश्य युवक-युवती परिचय सम्मेलन के शुभारंभ प्रसंग पर संगठन के प्रदेशाध्यक्ष एवं राज्य के पूर्व गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता ने उक्त प्रेरक बातें कही। समाजसेवी प्रेमचंद गोयल, टीकमचंद गर्ग सहित अनेक प्रमुख समाजसेवी उपस्थित थे। सुबह दस्तूर गार्डन का नजारा देखने लायक था। विभिन्न राज्यों से प्रत्याशियों और पालकों के समूहों के आगमन का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। राष्ट्रगान और दीप प्रज्वलन के साथ ही परिचय का दौर भी शुरू कर दिया गया था। प्रारंभ में आयोजन समिति के स्वागताध्यक्ष विनोद अग्रवाल, विष्णु बिंदल, अध्यक्ष दिनेश मित्तल, संगठन के प्रांतीय महामंत्री अरविंद बागड़ी, प्रमुख संयोजक राजेश गर्ग, जिलाध्यक्ष धीरज खंडेलवाल, शिव जिंदल आदि ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। मंच का संचालन शशि गर्ग, किरण अग्रवाल एवं अंकिता सिंघल ने किया जबकि शुभारंभ समारोह में विकास डागा ने संचालन किया।
शाम होते होते लगभग 540 प्रत्याशियों ने मंच पर आ कर बहुत बेबाकी से अपने परिचय दिए। शुरूआत नागर समाज इंदौर की एक तलाकशुदा युवती ने अपना परिचय देते हुए की। दिनभर चले मैराथन दौर में अनेक दिलचस्प प्रसंग भी देखने-सुनने को मिले। किसी को बड़े शहरों में रहने वाले जीवनसाथी की तलाश थी तो किसी को अपने कारोबार में हाथ बंटा सकने वाली पढ़ी लिखी बहू की। 38 से 40 वर्ष आयु समूह के प्रत्याशियों ने विधवा और तलाकशुदा जीवनसाथी के लिए भी दिलचस्पी दिखाई वहीं उच्च शिक्षित उम्मीदवारों में से अधिकांश ने अपने समकक्ष शैक्षणिक योग्यता और अपने कार्यस्थल वाले शहर में रहने वाले प्रत्याशी को प्राथमिकता देने की बात कहीं। कुल मिलाकर देश के 22 राज्यों तथा अमेरिका, दुबई एवं सिंगापुर में कार्यरत उम्मीदवारों ने देर शाम तक अपने लिए श्रेष्ठतम जीवनसाथी की तलाश का अभियान चलाए रखा। संध्या को लगभग 340 रिश्तों पर दोनों पक्षों की सहमति के आसार बन गए थे। इसी तरह 500 से अधिक रिश्तों पर मंत्रणा का दौर चलने की सूचना भी मिली है।
सम्मेलन में वैश्य समाज के 13 प्रमुख घटकों के प्रत्याशी भाग ले रहे है। इनमें अग्रवाल, माहेश्वरी, जैन, खंडेलवाल, मेडतवाल, नागर चित्तौड़ा, गहोई वैश्य, दृढ़ोमर, अग्रहरि वैश्य, मोढ़ मांडलिया, पोरवाल, विजयवर्गीय, नीमा समाज के युवक-युवती एवं उनके पालक बड़ी संख्या में मौजूद थे। रविवार को सुबह 10 बजे से परिचय सम्मेलन का सिलसिला शुरू हो जाएगा। शुभारंभ समारोह में समाजसेवी एवं आयोजन के प्रमुख संरक्षक गिरीश अग्रवाल, गृह मंत्री बाला बच्चन, लोक निर्माण मंत्री सज्जनसिंह वर्मा, खेल मंत्री जीतू पटवारी, स्वास्थ मंत्री तुलसी सिलावट एवं वन मंत्री उमंग सिंघार भी अतिथि के रूप में आएंगे। परिचय का दौर रविवार को दिनभर चलता रहेगा। सम्मेलन के लिए प्रत्याशियों का स्पॉट पंजीयन सम्मेलन स्थल पर जारी रहेगा। सम्मेलन स्थल पर वाटरप्रूफ शामियाना बनाकर वहां पूछताछ कार्यालय, स्वागत कथ, क्लॉक रूम, कम्प्यूटर एवं कुंडली मिलाने के लिए ज्योतिषी, चिकित्सा, अतिथि स्वागत, मंच संचालन सहित विभिन्न कक्ष बनाए गए हैं। इसके अलावा मेहमानों के लिए चाय-स्वल्पाहार, भोजन आदि सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगीं। आज सम्मेलन की व्यवस्थाओं और प्रत्याशियों की संख्या को देखते हुए इसे वैश्य समाज के मिनी कुंभ की संज्ञा दी गई। अधिकांश मेहमानों ने इतने विराट परिचय सम्मेलन को देख कर पहली प्रतिक्रिया में यहीं कहा कि यह तो मिनी कुंभ जैसा नजारा है।
दोपहर में समाजसेवी एवं आयोजन समिति के प्रमुख संरक्षक गिरीश अग्रवाल ने सम्मेलन का औपचारिक शुभारंभ किया। समाजसेवी पवन सिंघानिया, रमेश मित्तल मेडिकेप्स, टीकमचंद गर्ग के विशेष आतिथ्य में वैश्य घटकों के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ उन्होंने दीप प्रज्जवलन किया। स्वागत उद्बोधन में अध्यक्ष दिनेश मित्तल ने बताया कि चौथी बार हो रहे इस अ.भा. परिचय सम्मेलन में साढ़े आठ हजार प्रविष्ठियां प्राप्त हुई हैं जो एक कीर्तिमान है। इनमें भी उच्च शिक्षित प्रत्याशियों की संख्या 3500 है। कार्यक्रम में म.प्र. वैश्य महासम्मेलन के प्रदेशाध्यक्ष उमाशंकर गुप्ता ने भी अपने विचार व्यक्त किए और वैश्य एकता को मजबूत बनाने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि वैश्य एकता से हमारी ताकत की नई राह खुलेगी।  

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