धर्म में विज्ञान और विज्ञान में धर्म के समावेश की ज़रूरत : सुधांशु जी महाराजश्री

नासा ने ब्रह्माण्ड में सदैव ॐकार के गुंजन की दी विश्व को सूचना

अनूठे भक्ति व प्रेरणा के भाव-लोक में डूबे पुणेवासी

सन्तश्री सुधांशु जी महाराज ने ली ध्यान व योग की कक्षा

साधकों ने सीखे ज्ञान को दैनिक जीवन में उतारने का दिया वचन

पुणे। यहाँ पिंपरी क्षेत्र के बालाजी लान्स परिसर में चल रहे विराट भक्ति सत्संग महोत्सव के दूसरे दिवस के पूर्वाहनक़ालीन सत्र का श्रीगणेश सन्तश्री सुधांशु जी महाराज ने सदाशिव के ध्यान से किया।‘’बम-बम भोले शंकर, डम-डम  डमरू बाजे’’ के दिव्य संगीत के साथ उपस्थित हज़ारों स्त्री-पुरूषों ने मधुर करतल ध्वनि करते हुये भक्ति व प्रेरणा के अनूठे भावलोक में डुबकियाँ लगाईं। सत्संग महोत्सव का आयोजन विश्व जागृति मिशन के पुणे मण्डल द्वारा किया गया है।
 
इस अवसर पर आचार्य सुधांशु जी महाराज ने कहा कि शिव का दूसरा नाम ही ‘कल्याणदाता’ है। वेद सूक्ति ‘शिवं भूत्वा शिवं यजेत्’ की चर्चा करते हुये उन्होंने निज कल्याण से ऊपर उठकर बिना किसी भेदभाव के सर्वकल्याण के उच्चभाव तक पहुँचने का आहवान देशवासियों से किया।उन्होंने कहा कि आज के राष्ट्रीय परिदृश्य में मानवमात्र से प्रेम करते हुये राष्ट्रप्रेम एवं संस्कृतिप्रेम के लिए सभी प्रयत्न गम्भीरतापूर्वक किए जाने की महती आवश्यकता है।
 
सन्तश्री सुधांशु जी महाराज ने ध्यान की क्रियाओं के साथ-साथ सूक्ष्म योगासन भी योग-जिज्ञासुओं से कराए।उन्होंने ‘ॐकार’ की मानव जीवन में आध्यात्मिक व व्यावहारिक महत्ता पर भी प्रकाश डाला तथा नासा के अनुसंधान के परिणाम सभी को बताए। कहा कि ब्रह्माण्ड में निरन्तर ‘ॐ’ का गुंजन होता रहता है।महाराजश्री ने प्रभु श्रीकृष्ण की बाँसुरी की लय के साथ ‘ॐकार’ का गहरा ध्यान भी साधकों से कराया। उन्होंने सनातन संस्कृति को पूरी तरह वैज्ञानिक बताया और कहा कि आज आवश्यकता है कि धर्म में विज्ञान और विज्ञान में धर्म का समावेश समझदारीपूर्वक किया जाय।
 
इसके पूर्व आचार्य अनिल झा के नेतृत्व में नयी दिल्ली से आयी संगीत टोली के सदस्यों राम बिहारी, महेश सैनी, कश्मीरी लाल चुग, प्रमोद राय, चुन्नी लाल तंवर  तथा राहुल आनन्द ने मधुर संगीत प्रस्तुत किए।ख़ास बात यह थी कि ज़िन्दगी का शतक पूरा कर रहे वयोवृद्ध स्त्री-पुरुषों से लेकर छोटे-छोटे बच्चों तक ने योग-ध्यान कक्षा में उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
 
इस मौक़े पर महाराजश्री ने देवदूत (अनाथ) बच्चों की शिक्षा में सहयोग करने वाले रोहिणी जोशी, सुजाता देशपाण्डेय, आशीष मंसाली, मधुकर वान्दरे, शीता पाहो, सुभाष बेरी एवं नितिन चौधरी को मंच पर बुलाकर उनको अपनी शाबासी दी।

Leave a Reply