नए अस्पताल परिसर में खुलेंगे सीबीआरएन व स्किल डवलपमेंट सेंटर

कोटा । केंद्र सरकार की योजना के तहत एडवांस लाइफ सपोर्ट के लिए स्किल डवलपमेंट सेंटर और बड़ी आपदाओं से निपटने के लिए सीबीआरएन (केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर) सेंटर नए अस्पताल परिसर में खुलेंगे। इन दोनों सेंटरों के लिए मंगलवार को भारत सरकार की टीम ने अस्पताल परिसर में विभिन्न साइट देखी और अंत में जगह फाइनल करके रिपोर्ट भी तैयार कर ली। टीम में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से डॉ. योगेश व एक आर्किटेक्ट तथा राज्य प्रतिनिधि के रूप में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशालय से डॉ. रश्मि शामिल रहीं। टीम ने कार्यवाहक अधीक्षक डॉ. आरपी मीणा व दोनों सेंटरों के लिए नोडल ऑफिसर बनाए गए डॉ. संगीता सक्सेना व डॉ. संजय कालानी के साथ चिह्नित साइट्स देखी। सभी जगहों को देखने के बाद टीम ने जीरियाट्रिक क्लीनिक की बगल में 60 गुणा 60 वर्ग मीटर आकार में सीबीआरएन सेंटर और दूसरी मंजिल पर ट्रोमा सेंटर के ऊपर 4 हजार वर्ग फीट में स्किल डवलपमेंट सेंटर बनाना तय कर लिया। डॉ. आरपी मीणा ने बताया कि इन दोनों ही प्रोजेक्ट्स को लेकर ट्रेनिंग के संबंध में हमसे एक रिपोर्ट मांगी गई थी, जो दे दी गई है। इसमें 10 डॉक्टरों व 10 नर्सिंग ट्यूटर्स को ट्रेनिंग के नामित किया गया है। पूर्व में केंद्र से आए लैटर में सीबीआरएन सेंटर के लिए रामगंजमंडी सीएचसी को तय किया गया था, लेकिन बाद में राज्य सरकार के अधिकारियों से चर्चा कर इस सेंटर को कोटा मेडिकल कॉलेज स्तर पर ही बनाने का निर्णय हुआ है। डॉ. मीणा ने बताया कि टीम के सदस्य आर्किटेक्ट एक-दो दिन कोटा में ही रहेंगे और वे यहां पीडब्ल्यूडी समेत संबंधित विभागों के इंजीनियरों के साथ बैठकर पूरी रिपोर्ट तैयार करेंगे। दोनों का सिविल वर्क भारत सरकार की एजेंसियां ही करेगी, राज्य सरकार को सिर्फ जमीन देनी है। ये दोनों सेंटर हाड़ौती के लिए बड़ी सौगात होंगे। कोटा बड़ी आपदा से निपटने में सक्षम होगा। सीबीआरएन सेंटर की नोडल ऑफिसर डॉ. संगीता सक्सेना ने बताया कि देश में सैकंडरी लेवल के 31 सेंटर बनाए जा रहे हैं, जिनमें से राजस्थान में एकमात्र कोटा का चयन किया गया है। वहीं 4 टरशरी लेवल के सेंटर होंगे, जो इन 31 सेंटरों से भी हाईटेक होंगे। इसके लिए मुंबई, कोलकाता, चेन्नई व दिल्ली का चयन किया गया है। एडंवास लाइफ सपोर्ट स्किल डवलपमेंट सेंटर के नोडल ऑफिसर डॉ. संजय कालानी के मुताबिक, इस सेंटर में लाइफ सेविंग उपकरणों व लाइफ सेविंग ट्रीटमेंट को लेकर डॉक्टरों समेत पैरा मेडिकल स्टाफ को ट्रेंड किया जाएगा। इसके सिविल वर्क पर 1.4 करोड़ खर्च होंगे।
