नए मॉडल्स के दम पर मल्टी पर्पज वीइकल्स ने फुल स्पीड में की वापसी

मुंबई । स्पोर्ट्स यूटिलिटी वीइकल्स से पिछड़ते मल्टी पर्पज वीइकल्स सेगमेंट ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। आकर्षक फीचर्स वाली नई गाड़ियों के लांच, इंटरसिटी यात्राओं की अधिक डिमांड और लोगों में इनकी बढ़ती लोकप्रियता के चलते वित्तवर्ष 2019 में इस सेगमेंट ने 14 प्रतिशत ग्रोथ दर्ज की है। महिंद्रा मराजो और मारुति सुजुकी अर्टिगा के सफल लांच से मल्टी पर्पज वीइकल्स सेगमेंट की स्थिति में सुधार आया। टोयोटा इनोवा की मजबूत डिमांड और नई गाड़ियों की बढ़ती बिक्री से एमपीवी भारत की ऑटो इंडस्ट्री में सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट बन गया। अगर एमपीवी सेगमेंट में डबल डिजिट्स में ग्रोथ नहीं होती तो यूटिलिटी वीइकल सेगमेंट नेगेटिव टेरिटरी में चला जाता। बात दे कि वित्तवर्ष 2019 में एसयूवी की बिक्री में पिछले एक दशक में पहली बार गिरावट देखने को मिलती। टोयोटा किर्लोस्कर मोटर्स के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर एन राजा ने कहा, नई एमपीवी की टफनेस, कम्फर्ट,राइड क्वॉलिटी, एडवांस्ड स्टाइलिंग और सेफ्टी फीचर्स के कारण पर्सनल सेगमेंट वाले कस्टमर्स में इनकी डिमांड बढ़ी है। उन्होंने कहा,एमपीवी पीपल मूवर से बढ़कर फैमिली और पर्सनल कार बनती जा रही हैं।
वित्तवर्ष 2019 में 1.79 लाख एमपीवी की बिक्री हुई जिसके चलते इस सेगमेंट ने 14.1 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की। पैसेंजर गाड़ियों की कुल ग्रोथ 2.7 प्रतिशत रही। वहीं,वित्तवर्ष की पहली छमाही में ठीक इसके विपरीत एमवीपी की बिक्री में 4.8 प्रतिशत की गिरावट आई थी, जबकि उसी दौरान मार्केट 6.9 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा था। फ्लीट सेगमेंट के साथ इन गाड़ियों को जोड़कर देखे जाने के अलावा डिजाइन और फीचर्स के मामले में ज्यादा आकर्षक न होने के कारण पर्सनल बायर भी एमपीवी से एसयूवी की ओर जाने लगे थे। इसके चलते पिछले तीन में से दो वित्त वर्षों में एमपीवी सेगमेंट गिरावट का शिकार हुआ और कुछ कंपनियों ने इस सेगमेंट से किनारा कर लिया। हुंडई मोटर इंडिया ने एक एमपीवी के लिए प्रॉडक्शन लेवल की तैयारी कर ली थी, लेकिन उसने कदम खींच लिए। 

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