नगरीय निकाय चुनाव में कांग्रेसी विधायकों को बनाएंगे क्षेत्र का प्रभारी

भोपाल । नगरीय निकाय चुनाव तीन महीने तक टलने के बाद भी कांग्रेस के नेताओं को घर बैठने नहीं दिया जाएगा। भोपाल में हुई बैठक में पूर्व मख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि विधायक अपने-अपने क्षेत्र में निगम और पंचायत चुनाव जिताने की जवाबदारी लें। वे यह मानकर चलें कि ये विधानसभा चुनाव का ट्रायल है। इस बार कांग्रेस ने भाजपा से पहले तैयारियां शुरू कर दी हैं और महापौर, पार्षद, पंच एवं सरपंच के दावेदारों से बायोडाटा तक लेने का काम चल रहा था, लेकिन निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस की सारी तैयारियों पर पानी फेर दिया। फिर भी कांग्रेस के बड़े नेताओं ने जिलों के अध्यक्षों से कहा है कि वे चुप नहीं बैठें और संगठन का ढांचा मजबूत करने के लिए सतत मैदान में रहें। दो दिन पहले भोपाल में हुई बैठक में पूर्व मंत्री जीतू पटवारी और सज्जनसिंह वर्मा भी मौजूद थे। बैठक में कमलनाथ और अन्य बड़े नेताओं ने नगरीय निकाय चुनावों के लिए पदाधिकारियों से कमर कसने को कहा। वहीं तय हुआ कि चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों को जिताने के लिए कांग्रेस के विधायकों को जवाबदारी सौंपी जाएगी। इसमें पूर्व मंत्री भी शामिल रहेंगे। हालांकि यह प्रयोग कांग्रेस विधानसभा उपचुनाव में कर चुकी है और मंत्रियों के साथ-साथ विधायकों को उस क्षेत्र में उतारा था, लेकिन परिणाम अपेक्षाजनक नहीं आए। कमलनाथ ने तो इस चुनाव को 2023 के विधानसभा का ट्रायल बताकर पूरी मेहनत से काम करने के लिए कहा है। अब देखना यह है कि कांग्रेस की ये रणनीति निकाय चुनाव में उसे कितनी सीट दिला पाती है।
