निजी स्कूलों पर लगी नकेल : फीस नियंत्रण के लिये लागू किये नियम

भोपाल।शिवराज सरकार ने प्रदेश के निजी स्कूलों पर नकेल कसने के लिये नये नियम लागू कर दिये हैं। दरअसल, वर्ष 2017 में तत्कालीन शिवराज सरकार ने मप्र निजी विद्यालय फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन अधिनियम लागू किया था। इस अधिनियम का क्रियान्वयन करने के लिये 26 जून, 2018 को नियमों का प्रारुप जारी किया गया था जिस पर तीस दिन के अंदर आम लोगों से दावे एवं आपत्तियां मांगी गई थीं। परन्तु इस पर अमल नहीं हो सका था। दिसम्बर 2018 में शिवराज सरकार चली गई और कांग्रेस की कमलनाथ सरकार आ गई। परन्तु उसने भी इन नियमों पर कोई अमल नहीं किया। अब पुन: शिवराज सरकार आने पर इस पर अमल किया गया है तथा नये नियम प्रभावशील कर दिये गये हैं।
नये नियमों में अब यह करना होगा :
90 दिनों के अंदर प्रत्येक प्रायवेट स्कूल को पोर्टल पर अपने अहिभलेख दर्ज कराने होंगे। तीन सालों के अंकेक्षित खातें देने होंगे। आगामी वर्ष की प्रस्तावित फीस संरचना पोर्टल पर अपलोड करना होगी। पिछले शैक्षणिक सत्र की तुलना में फीस की वृध्दि दस प्रतिशत से कम है तो निजी स्कूल अगले शैक्षणिक सत्र हेतु यह बढ़ी फीस ले सकेगा। यदि फीस में वृध्दि दस से 15 प्रतिशत के बीच है तो जिला स्तरीय समिति 45 कार्यििदवस में इस पर निर्णय लेगी। यदि फीस में वृध्दि 15 प्रतिशत से अधिक है तो राज्य स्तरीय समिति 7 कार्यदिवस में इस पर निर्णय लेगी। निजी स्कूल को फीस ऑनलाईन या आफलाईन जमा कराना होगी। जमा फीस को बैंक खाते में रखना होगा। फीस वसूली की रसीद देनी होगी। सभी तरह की फीस की जानकारी नोटिस बोर्ड या विद्यालय की वेबसाईट पर दिखानी होगी। निजी स्कूल के प्रबंधन द्वारा छात्र या अभिभावकों को पुस्तकें, यूनिफार्म, टाई, जूते, कॉपी आदि केवल चयनित विक्रेताओं से क्रय करने के लिये बाध्य नहीं किया जायेगा तथा छात्र या अभिभावक इन्हें खुले बाजार से क्रय करने के लिये स्वतंत्र होंगे। स्कूल द्वारा यूनिफार्म को छोडक़र किसी भी पाठ्य सामग्री पर विद्यालय का नाम उल्लेखित नहीं किया जायेगा। यूनिफार्म हर साल नहीं बदली जायेगी तथा तीन साल तक वही रहेगी। परिवहन सुविधाओं के संबंध में गाईडलाईन का पालन किया जायेगा। अनुचित फीस वृध्दि के संबंध में जिला समिति के समक्ष शिकायत की जा सकेगी। जिला समिति को कार्यवाही करने के लिये सिविल न्यायालय की शक्तियां प्राप्त रहेंगी। जिला समिति दोषी पाये गये स्कूल पर दो से लेकर छह लाख रुपये तक का अर्थदण्ड लगा सकेगी एवं बढ़ी फीस वापस करवा सकेगी। अर्थदण्ड का भुगतान न करने पर आरसीसी जारी होगी। जिला समिति के निर्णय के खिलाफ राज्य समिति के समक्ष अपील की जा सकेगी।
