पंजाब सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस

पंजाब| सरकार द्वारा 8393 प्री प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती के लिए केवल बदली गई शर्तों को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न भर्ती पर रोक लगा दी जाए। याचिका दाखिल करते हुए वीरपाल व अन्य ने हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब सरकार ने 23 नवंबर 2020 को प्री-प्राइमरी शिक्षकों के 8393 पदों पर आवेदन मांगे थे। 

बड़ी संख्या में इस भर्ती के लिए लोगों ने आवेदन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में एजुकेशन प्रोवाइडर, एजुकेशन वालंटियर, एजुकेशन गारंटी स्कीम वालंटियर, अल्टरनेटिव और इनोवेटिव एजुकेशन वालंटियर, स्पेशल ट्रेनिंग रिसोर्स वालंटियर, इंक्लूसिव एजुकेशनल वालंटियर ने राज्यभर में प्रदर्शन शुरू कर दिया। ये लोग सर्व शिक्षा अभियान के तहत बैक डोर से नियुक्त हुए थे। इनके दबाव में सरकार ने इस विज्ञापन को वापस ले लिया और 14 सितंबर 2021 को दोबारा इन पदों के लिए विज्ञापन जारी कर दिया। 

इस बार इन पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदक को एजुकेशन प्रोवाइडर, एजुकेशन वालंटियर, एजुकेशन गारंटी स्कीम वालंटियर, अल्टरनेटिव और इनोवेटिव एजुकेशन वालंटियर, स्पेशल ट्रेनिंग रिसोर्स वालंटियर, इंक्लूसिव एजुकेशनल वालंटियर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव अनिवार्य कर दिया गया। 
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि सरकार ने यह शर्तें पहले से कार्यरत शिक्षकों को एडजस्ट करने के लिए ही लगाई हैं। इस तरह तो कोई भी आवेदक जिसे अनुभव नहीं है उसकी नियुक्ति ही नहीं होगी। ऐसा संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के खिलाफ है। इन पदों के लिए सभी योग्य उम्मीदवारों को आवेदन का मौका दिया जाना चाहिए। इस प्रकार केवल चुनिंदा लोगों के लिए प्रवेश का द्वार खोलना आम लोगों के अधिकारों का हनन है। इसके साथ ही इस प्रकार भर्ती करने से भर्ती की गुणवत्ता भी प्रभावित होगी। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी पूछा है कि क्यों न इस भर्ती पर रोक लगा दी जाए। 

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