पटवारियों की छीनी आईडी, भड़के पटवारी

बिलासपुर । लडऩा भी चाहिए, पूरा मीडिया कवरेज दे रहा है मतलब पटवारी की मांगों को शासन प्रशासन की चौखट तक पहुंचाने का एक सराहनीय प्रयास कर रहा है। उसके बाद भी आलम ये हो चुका है कि पहले राजस्व विभाग के सचिव ने हड़ताल खत्म करने और काम करने की चेतावनी दी इतने में भी बात नही बनी तो पटवारियों ने कहा कि मांग पूरी होगी उसके बाद ही अनिश्चित कालीन हड़ताल वापस ली जाएगी, तब तक इधर तहसीलदार ने पटवारियों का आईडी छिन लिया। जिसकी वजह से पटवारियों के बीच हड़कम्प मच गया,खैर ये तो प्रशासनिक व्यवस्था का एक हिस्सा था हुआ होना था और हो गया, लेकिन बात यही पर खत्म नही होती, बल्कि जब तहसीलदार के खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया तो पटवारी संघ के एक पटवारी को ऐसी मिर्ची लगी कि तिलमिला गए और इतना ज्यादा तिलमिला गए कि गुस्से में अपना आपा खो बैठे, एक तो 12 दिनों की हड़ताल और ऊपर से खर्चा पानी बंद ऊपर से आईडी छिन जाने की कार्यवाही और उसके बाद खबर भी लग गया, तो जाहिर है कि मिर्ची लगेगी ही, अब मजे की बात इसमे ये हो गयी कि तिलमिलाये पटवारी ने बिलासपुर पटवारी संघ के व्हाट्सप ग्रुप में ये लिख दिया कि ये बात लीक होकर पत्रकार तक आ गई। एक कहावत है कि घर का भेदी लंका ढाए मतलब सूत्रों से निकल कर एक जानकारी सामने आई नहीं कि पटवारी साहब के पेट में ऐंठन शुरू हो गया, बस फिर क्या था हमने उस पटवारी से सरल और सहज भाषा का प्रयोग करते हुए मर्यादा से बात भी किया और आखिरकार पटवारी ने गलती मानते हुए कहा कि नही वह वाक्य आपके लिए नही लिखा गया है हमनें सोचा कि उन्हें इस बात का अफसोस हो गया है लेकिन पल भर के बाद फिर वही हुआ पटवारियों के संघ के वाट्सएप ग्रुप में तिलमिला कर लिखना,बोलना और शुरू कर दिया, इसका मतलब साफ है कि पटवारियों के बीच खलबली मची हुई है और इसका असर भी हो रहा है जबकि जाहिर सी बात है कि इसमे मिर्ची लगने वाली कोई बात ही नही है , पत्रकार को खबर मिली और उसने वही ख़बर लगाया जो तहसीलदार ने अपने बयान में दिया था लेकिन यह बयान से भी पटवारियो को नागवार गुजरा और अब रहा सवाल हड़ताल का तो 13 वें दिन की शुरुआत यानि पटवारियों की हड़ताल वाली बात लंबी हो चुकी है जिसमे पटवारी ये सोचने में लगे हुए है कि आखिर पटवारी के ग्रुप की खबर आखिर कौन विभीषण पत्रकार को दे दे रहा है, कौन लीक कर रहा है पटवारियों की गोपनीय बात को लेकिन पटवारियों को ये नही भूलना चाहिए कि पत्रकारों के भी अपने सूत्र होते हैं उनके बीच आपसी विवाद और किसी के खिलाफ हुई बातचीत आसानी से उस तक पहुँच जाती है। पुलिस की तरह पत्रकारों के भी सूत्र होते हैं। फिलहाल तो पटवारी उस खबरीलाल(सूत्र) की खोज में है जो खबर पत्रकार तक पहुंचा कर पटवारियों की कौम में खलबली मचा दिया है और इधर मीडिया, खबर की खोज में है कि अब आगे पटवारियों की मांग का क्या होगा!
