पर्यटन मण्डल में अनुराधा दुबे की नियुक्ति को चुनौती देने वाली सुशील शर्मा की याचिका उच्च न्यायालय ने स्वीकारी

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल की बहुचर्चित अनुराधा दुबे की कथित अवैधानिक नियुक्ति का मामला उच्च न्यायालय बिलासपुर पहुंच गया है। उल्लेखनीय है कि अनुराधा दुबे को पर्यटन मण्डल में भारतीय जनता पार्टी के शासन-काल में पर्यटन अधिकारी के पद पर की गयी निजी स्कूल टीचर की अवैधानिक प्रतिनियुक्ति व संविलियन से उनकी बर्खास्तगी के बावजूद भूपेश सरकार की पूरी कैबिनेट ने पद ना होते हुए भी विशेष प्रकरण बता कर पर्यटन मण्डल में ही जनसंपर्क अधिकारी का नया पद सृजित कर निर्धारित योग्यता ना होने के बाद भी दी गयी नियम विरुद्ध नियुक्ति को चुनौती देने वाली "बस्तर बन्धु" के संपादक सुशील शर्मा की पी आई एल नम्बर 85 – 2021 पर सुनवाई करते हुए आज 11/08/2021 को प्रभारी मुख्य न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति एन के चन्द्रवंशी की डिवीजऩ बेन्च ने स्वीकार कर ली है और संबंधित पक्षों सचिव पर्यटन विभाग छत्तीसगढ़ शासन, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ पर्यटन मण्डल एवं श्रीमती अनुराधा दुबे को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
सुशील शर्मा की ओर से बिलासपुर के युवा अधिवक्ता फैज़ काज़ी ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रभावी पैरवी की। आशा की जाती है कि जब तीन-चार दिनों के अंदर संबंधित पक्षों को हाईकोर्ट का नोटिस मिलेगा तब उनके पैरों के नीचे से ज़मीन खिसकने लगेगी और तब उन्हें पता चलेगा कि ग़लत फ़ैसले लेना, अन्याय करना, भ्रष्टाचार पर पर्दा डालना, किसी निर्दोष को सताना किस भाव पड़ता है ? अनुराधा दुबे की नियुक्ति संविलियन व कैबिनेट से नियम विरुद्ध अनुशंसा करवाने व इसमें साथ देने वाले सब के सब हाईकोर्ट में रगड़े जाएंगे।
भूपेश मंत्रिमंडल के पास अब भी अवसर है कि वह अनुराधा दुबे के पक्ष में उन्हें पर्यटन मण्डल में विशेष प्रकरण बता पद रिक्त ना होने, निर्धारित योग्यता धारित ना होने के बाद भी नियुक्ति देने के किए गए अपने उस फ़ैसले को पलट दे ज रत्ती भर भी न्याय संगत नहीं था। पहले ही यह सब कर लेंगे तो हाई कोर्ट में उपस्थित होने पर फटकार खाने से तो बच जाएंगे और कुछ तो छवि कायम रहेगी अन्यथा एक ही अपात्र महिला की खुशी के लिए सारे मंत्रिमंडल को दंडवत कराने का कुछ तो परिणाम भुगतना ही पड़ेगा।
