फगवाड़ा में कांग्रेस की जीत के कई फैक्टर आए सामने, भाजपा-शिअद हुए परेशान

चार विधानसभाओं में हुए उपचुनाव में फगवाड़ा में कांग्रेस की लीड सबसे अधिक 26 हजार 116 मतों की रही। जिससे अकाली दल व भाजपा को गहरा झटका लगा है। क्योंकि यह सीट भाजपा के पास लंबे समय से रही है। इसी सीट से जीतकर भाजपा के चौधरी स्वर्णा राम सूबे के मंत्री बने और केंद्रीय राज्य मंत्री सोम प्रकाश दो बार जीते। लेकिन कांग्रेस ने इस सीट पर रिकॉर्ड जीत हासिल की है।
इसमें एक वजह कैप्टन अमरिंदर सिंह की पंथक वोट में सेंधमारी भी है। फगवाड़ा का इलाका भी एनआरआई का गढ़ माना जाता है। कैप्टन ने यूके के सांसद तनमनजीत सिंह ढेसी के पिता जसपाल ढेसी को कांग्रेस का हाथ थमाकर जहां एनआरआई वोटरों में कांग्रेस का विश्वास बढ़ाया। वहीं पंथक वोट बैंक में सेंधमारी की।
जसपाल ढेसी के भाई एसजीपीसी के सदस्य परमजीत सिंह रायपुर भी कांग्रेस में आए गए और उन्होंने पंथक वोटरों को कांग्रेस की तरफ मोड़ दिया। रायपुर अकाली दल के काफी सीनियर नेता हैं और 2011 से लगातार एसजीपीसी के सदस्य हैं। जालंधर व फगवाड़ा में हर साल काफी बढ़ा कीर्तन दरबार करवाते हैं।
जहां पर हजारों की संख्या में संगत विदेशों से आकर हिस्सा लेती है। जिस कारण पंथक वोटरों में उनकी खासी पैठ है। रायपुर ने कांग्रेस उम्मीदवार बलविंदर सिंह धालीवाल के पक्ष में डटकर प्रचार किया। वहीं जसपाल ढेसी ने एनआरआई को कांग्रेस के साथ जोड़ा।
अकाली दल व भाजपा फगवाड़ा सीट के परिणाम को लेकर परेशान हैं। पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक अकाली दल व भाजपा मंथन करने में जुटी है। पार्टी का एक गुट रायपुर व ढेसी को दोबारा पार्टी के साथ जोड़ने का पक्षधर है। इस गुट ने सुखबीर बादल को इस बात से अवगत करा दिया है कि पार्टी को अगर 2022 के चुनाव मजबूती से लड़ने हैं तो पंथक व एनआरआई वोटरों को पक्ष में करना होगा।
