बढ़ते मामलों पर बोले विशेषज्ञ- मौसम का नहीं है असर, फिर तेजी से फैल सकता है कोरोना

देश के कुछ हिस्सों में एक बार फिर कोरोना के मामलों में तेजी आने से विशेषज्ञ चिंतित हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पिछले साल के रिकॉर्ड को देखें तो मौसम ठीक होने के साथ-साथ कोरोना के मरीजों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हो सकती है. इसके साथ ही कोरोना के तीन नए वैरिएंट और भी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं.
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के ऑपरेशन ग्रुप फॉर कोविड टास्क फोर्स के हेड डॉ. एन के अरोड़ा कहते हैं कि वायरस से जुड़े हुए जो भी रोग होते हैं ये सभी एक लहर की तरह आते हैं. इनका मौसम या समय से कोई लेना देना नहीं है. कोरोना वायरस के बारे में भी देखा गया है कि इसके संबंध में मौसम को लेकर लगाए गए अनुमान गलत ही साबित हुए हैं.
पिछले साल जब कोरोना आया तो कहा गया कि गर्मी आते ही इसके मामलों में कमी आ सकती है. हालांकि इसका उल्टा हुआ. इसके बाद कहा गया कि सर्दी आने पर मामले बढ़ सकते हैं लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ. बल्कि बीच में जरूर मामले तेजी से बढ़े. ऐसे में इस वायरस का गर्मी या सर्दी से कोई लेना-देना नहीं है. इसका प्रसार लहर के रूप में हो रहा है.
दोबारा कोरोना के मामले बढ़ने की एक जो दूसरी वजह है वह कोरोना के मामलों में आई कमी के बाद बढ़ी लापरवाही और कोरोना वैक्सीन के आने से पैदा हुई निश्चिंतता भी हो सकती है. वैक्सीन आने के बाद उन लोगों को भी लगने लगा है कि कोरोना कुछ नहीं बिगाड़ सकता जिन्होंने वैक्सीन नहीं ली है. ऐसे में यह चिंता की बात है.
जनवरी में हुए सीरो सर्वे में सामने आया था कि देश के सिर्फ 25 फीसदी लोग ही कोरोना की गिरफ्त में आए हैं या इनमें एंटीबॉडीज बनी हैं. इससे तय होता है कि 75 फीसदी लोग अभी भी कोरोना की चपेट में आने से सुरक्षित नहीं हैं. ये कभी भी कोरोना के शिकार बन सकते हैं. लिहाजा दोबारा कोरोना का फैलना चिंता पैदा कर रहा है कि कहीं यह पिछले साल की तरह बड़ा रूप न ले ले.
मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग के पालन में हो रही लापरवाही
डॉ. एन के अरोड़ा कहते हैं कि पिछले कुछ समय से उन राज्यों में भी कोरोना के नियमों में ढिलाई बरती जा रही है जहां कोरोना वायरस का अच्छा खासा प्रकोप रहा है. दिल्ली में ही देखें तो मास्क को लेकर पहले जितनी सख्ती नहीं है. इतना ही नहीं बाजारों और सार्वजनिक जगहों, सार्वजनिक कार्यक्रमों में बढ़ती भीड़ इस ओर इशारा कर रही है कि लोग कोरोना को अब हल्के में ले रहे हैं. सोशल डिस्टेंसिंग जैसी कोई चीज अब दिखाई नहीं दे रही. यही वजह है कि कोरोना एक बार फिर उसी गति से वापस आ सकता है.
