बिहार के कटिहार में तारिक व दुलाल में सीधा मुकाबला

दिन : बुधवार स्थान : दलन चौक। करीब 11 बजने को हैं। मौसम में गर्माहट है। लेकिन चौराहे की चाय दुकान सूनी है। सातवें दिन चुनाव है। शहर के चौक-चौराहों से लेकर गांव की गलियों तक चुनाव को लेकर कोई उत्साह नहीं। वोटरों में सन्नाटा है। मुद्दे गौण हैं, जातीय गोलबंदी ही फैसला करेगी। मुख्य मुकाबला कांग्रेस के तारिक अनवर व जेडीयू के दुलालचंद गोस्वामी में है। राकांपा की तरफ से मो. शकुर भी मैदान में ताल ठोंक रहे हैं।
यहां मुकाबला कांग्रेस-जदयू में ही है लेकिन राकांपा ने इसे त्रिकोणीय बना दिया है। तारिक के सामने चुनौती ये होगी कि वे कांग्रेस की गुटबाजी से कैसे निपटते हैं और मुस्लिम मतों के बिखराव को कैसे रोकते हैं। राकांपा से वापस कांग्रेस में आए तारिक को लेकर पार्टी के अंदर भी सब सामान्य नहीं है। लेकिन उससे बड़ी चुनौती उनके लिए होगी कि वे मुस्लिम मतों का बिखराव कैसे रोक पाते हैं। यह तय है कि इस सीट पर मुस्लिम वोट ही निर्णायक होगा। शेरशाहबादी मुस्लिमों की अच्छी संख्या है।
वहीं जदयू की तरफ से पूर्व विधायक दुलालचंद गोस्वामी पहली बार संसदीय सीट पर मैदान में हैं। गठबंधन में यह सीट जदयू को मिल तो जरूर गई लेकिन गठबंधन की गांठ गहरी नहीं है। संगठन के रूप में जिले में जदयू कमजोर है। भाजपा के पास संगठन है तो सक्रिय समर्थन नहीं मिल रहा। एक वजह यह भी आ रही है कि अगर जदयू इस सीट से जीत जाती है तो विधानसभा में सीटों के बंटवारे पर भी जदयू का दबाव दिखेगा।
तारिक अनवर को कटिहार में राजनीति की कमान सीताराम केसरी ने दी थी। 1980 में पहली बार कटिहार से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन हार गये। इसके बाद पांच बार कटिहार के एमपी बने। दो बार शरद पवार की वजह से महाराष्ट्र से राज्यसभा के सांसद भी हुए। केंद्र में मंत्री भी रहे।
दुलालचंद गोस्वामी पहली बार 1995 में भाजपा के टिकट पर बलरामपुर से चुनाव जीते। 1998 में सीतामढ़ी के विधायक नागेंद्र यादव की बेटी नूतन प्रिया से प्रेम विवाह कर लिया। लेकिन उसके बाद दो चुनाव वे हार गये। 2010 में भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो निर्दलीय खड़े हुए। वे जीते और नीतीश कुमार ने उन्हें श्रम संसाधन मंत्री बना दिया।
