भोपाल मंडल सौर ऊर्जा से पैदा कर रहा 2.7 मेगावाट बिजली

भोपाल । सौर ऊर्जा से भोपाल रेल मंडल 2.7 मेगावाट बिजली पैदा कर रहा है, जो सालाना 27.22 लाख यूनिट होती है, जबकि मंडल को सालाना 250 लाख यूनिट बिजली की कुल जरूरत है। इसमें से 27.22 लाख यूनिट बिजली सौर ऊर्जा से पैदा की जा रही है। भोपाल रेल मंडल सौर ऊर्जा से बिजली पैदा कर आत्म-निर्भरता की राह पर चल पड़ा है। इसका दायरा रेल मंडल और बढ़ाने जा रहा है। रेलवे ने सौर ऊर्जा का सबसे बड़ा संयंत्र बीना में लगाया है, जो 1.7 मेगावाट क्षमता का है। यहां बिजली का उत्पादन शुरू हो गया है, जिसे नेशनल ग्रिड से जोड़ दिया गया है। सौर ऊर्जा से उत्पादित यह बिजली ट्रेनों को चलाने में मदद कर रही है। बाकी की बिजली कंपनियों से खरीदी जा रही है। बता दें कि सौर ऊर्जा से बिजली पैदा करने के लिए रेलवे ने भोपाल स्टेशन के प्लेटफार्मों के शेड पर सोलर प्लेटें लगाईं हैं। यही काम इटारसी स्टेशन पर किया है। इसके अलावा भोपाल स्टेशन के प्लेटफार्म-छह की तरफ बनकर तैयार नई बिल्डिंग की छत पर सोलर हाईब्रिड पावर सिस्टम लगाया है। यही काम शिवपुरी में किया है। दूसरे स्टेशनों पर इसका विस्तार किया जा रहा है। भोपाल रेल मंडल सौर ऊर्जा से बिजली पैदा करके 1.15 करोड़ रुपये की सालाना बचत कर रहा है। रेलवे विभाग बिजली कंपनियों से बिजली खरीदता है लेकिन जब से सौर ऊर्जा से बिजली पैदा होने लगी है, तब से सालाना 1.15 करोड़ रुपये की कम बिजली खरीदनी पड़ रही है। इस तरह रेलवे को सीधी बचत हो गई है। आने वाले समय में बचत का दायरा भी बढ़ने वाला है। जल विद्युत को छोड़ दिया जाए तो प्रदेश में ज्यादातर बिजली ताप विद्युत गृहों में पैदा हो रही है, जिनमें कोयले का उपयोग होता है। कोयले के जलने से फ्लाई ऐश निकलती है, जो एक तरह की राख होती है। यह आसपास के वातावरण को भारी नुकसान पहुंचाती है। जमीन बंजर हो जाती है। बारिश में इसके बहने से नदी-नालों व तालाबों में गाद जमा हो जाती है। वे उथले हो जाते हैं और हल्की बारिश में बाढ़ की स्थिति बन जाती है। जान-माल का नुकसान होता है। चिमनियों से निकलने वाली राख और तेज हवा के समय उसके फैलने से इंसानों के श्वसन तंत्र के माध्यम से शरीर में प्रवेश करती हैं। इससे श्वास संबंधी बीमारियां होती हैं। फेफड़े खराब होते हैं। इतना ही नहीं, कोयला व जीवाश्म के जलने से कार्बन उत्सर्जन होता है, जो पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। इस बारे में भोपाल रेल मंडल के डीआरएम उदय बोरवणकर का कहना है कि भोपाल रेल मंडल सौर ऊर्जा से बिजली पैदा करने की कोशिशों में जुटा है। बीते कुछ सालों की मेहनत में सफल भी हुए हैं। वर्तमान में 2.7 मेगावाट बिजली पैदा होने लगी है। इसमें तेजी से वृद्धि करने की कोशिशें जारी है। रेलवे की पूरी कोशिश हैं कि कोयला आधारित बिजली की जरूरत कम से कम हो।
