मप्र टाइगर स्टेट बनेगा या नहीं, फैसला जल्द

भोपाल । मध्य प्रदेश को इस बार भी टाइगर स्टेट का तमगा मिलेगा या नहीं। जुलाई के अंत में इसका पता चल जाएगा। 29 या 30 जुलाई को बाघों की गणना की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जा सकता है। वन्यजीव संस्थान देहरादून ने बाघों की गिनती के आंकड़ों का मिलान लगभग पूरा कर लिया है। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय जुलाई में इन आंकड़ों को सार्वजनिक करने की तैयारी में है। मप्र में बाघों की गिनती दिसंबर 2017 से मार्च 2018 तक की गई थी। वन अफसरों ने प्रदेश में 400 से अधिक बाघ होने का अनुमान लगाया था। अगर वन्य जीव संस्थान की रिपोर्ट में मप्र में 400 से ज्यादा बाघ पाए जाते हैं, तो प्रदेश को टाइगर स्टेज का दर्जा मिल सकता है। देश में हर चार सालों में बाघों की गिनती की जाती है। वर्ष 2014 की गणना के मुताबिक बाघों की संख्या के मामले में मध्य प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर रहा था।
कर्नाटक पहले स्थान पर
वहां 406 बाघ पाए गए थे। जबकि दूसरे नंबर पर उत्तराखंड रहा था, वहां 340 बाघ बताए गए थे। पिछली गणना में मप्र में 308 बाघ बताए गए थे। इससे मप्र तीसरे स्थान पर रहा था। इस बार की गणना में अच्छी स्थिति बताई जा रही है। गणना वैज्ञानिक तरीके से की गई है, इसलिए अफसरों को फिर से टाइगर स्टेट का दर्जा मिलने की उम्मीद जाग गई है। प्रदेश से 2006 में यह तमगा छिन गया था। प्रदेश में संरक्षित क्षेत्रों में ही नहीं, बाघ सामान्य वनमंडलों में भी बढ़े हैं। वन विभाग गांव और शहरी क्षेत्रों में बांधों की आवाजाही बढऩे की वजहभी संख्या में वृद्धि की बता रहे हैं। उनका मानना है कि जंगल में बाघ बढ़ गए हैं। इसलिए अपने रहवास के लिए नई जगह तलाश रहे हैं।
ऐसे हुई बाघों की गिनती
गिनती के दौरान खुले जंगल और संरक्षित क्षेत्रों में बांघों के पंजों के निशान, ट्रिप कैमरों के फोटो, पेड़ों पर खरोंच, विष्ठा और उनकी बैठने की जगह पर निशान व फोटो लिए गए थे। पहले स्टेट फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसएफआरआई) जबलपुर ने इसका मिलान किया और फिर वन्यजीव संस्थान देहरादून ने मिलान किया और फिर वन्यजीव संस्थान देहरादून ने मिलान कर रिपोर्ट तैयार की। वन अफसरों का कहना है कि कई स्तर पर उपस्थिति के प्रमाणों का मिलान करने के बाद रिपोर्ट तैयार की जाती है।
