ममता बनर्जी ने मतदाताओं को किया गुमराह, चुनाव आयोग से शिकायत खारिज

नई दिल्ली । नंदीग्राम में एक मतदान केंद्र पर बाहरी लोगों की मौजूदगी के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने कड़े शब्दों में जवाब दिया है। गड़बड़ी के उनके दावों को खारिज करते हुए आयोग ने कहा कि उनकी शिकायत तथ्यात्मक रूप से गलत है। साथ ही संकेत दिए कि उनके खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन व जनप्रतिनिधित्व कानून की धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ममता ने एक अप्रैल को नंदीग्राम में एक स्कूल में बने मतदान केंद्र संख्या 7 पर गड़बड़ी के आरोप लगाए थे और इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। इसका शनिवार को आयोग ने छह पेज में जवाब दिया। ममता के आरोपों को खारिज करते हुए आयोग ने सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए कहा कि मतदान के दौरान भाजपा, टीएमसी, भाकपा व निर्दलीय प्रत्याशी के एजेंट बूथ के अंदर थे। ड्यूटी पर तैनात अर्द्धसैन्य बल के जवान न तो मतदान केंद्र के अंदर गए और न ही किसी को मतदान करने से रोका। नंदीग्राम में मतदान के दौरान एक केंद्र पर भाजपा व टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी हुई थी। इस दौरान ममता मतदान केंद्र के अंदर कथित रूप से फंस गई थीं। बाद में उन्हें सुरक्षा बलों ने बाहर सुरक्षित निकाला था। उन्होंने चुनाव के दौरान आयोग पर कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर नाकाम रहने का आरोप लगाया था। ममता ने राज्यपाल को फोन कर मदद भी मांगी थी। आयोग ने कहा है कि यह खेद का विषय है कि सीएम पद पर बैठे शख्स व उम्मीदवार ने मीडिया के जरिए मतदाताओं को घंटों तक गुमराह किया। यह सब चुनावी प्रक्रिया के दौरान हुआ। इससे खराब आचरण नहीं हो सकता था। आयोग ने कहा कि इस बात की अलग से जांच की जा रही है कि क्या एक अप्रैल की घटनाओं में जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 131 और 123 (2) या आदर्श आचार संहिता के तहत कोई कार्रवाई हो सकती है।

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