महाभारत: जब 10 दिन के भीम के गिरने से टूट गई थी पर्वतशिला

 इसी में एक कहानी भीम से जुडी है। आप सभी जानते ही होंगे भीम ऐसे योद्धा थे जिनमे 100 हाथियों का बल था। कहा जाता है भगवान धर्म की कृपा से युधिष्ठिर का जन्म हुआ था और उसके बाद महाराजा पाण्डु ने पृथा (कुंती) से कहा कि क्षत्रिय बल से ही बड़ा कहा जाता है अतः ऐसे पुत्र का वरण करो जो बल में सबसे श्रेष्ठ हो। ऐसा होने के बाद कुंती ने वायु देव का आह्वाहन किया और कुंती के आह्वाहन से मृग पर आरूढ़ हो वायु देव कुंती के पास आये और कुंती को भयंकर पराक्रमी महाबली भीम को पुत्र रूप में प्राप्त होने का वरदान दिया। कहा जाता है भीम के जन्म लेते ही आकाश वाणी हुई थी 'यह कुमार समस्त बलवानों में श्रेष्ठ है।'

वहीं महाभारत के अनुसार भीम के जन्म लेने के 10वें दिन कुंती उन्हें गोद में लेकर देवताओं की पूजा करने के लिए कुटिया से बाहर निकली ही थीं कि उनपर एक व्याघ्र ने हमला कर दिया। इस दौरान पाण्डु ने अपने बाणों से उसे तुरंत ही ढेर कर दिया लेकिन उसके विकट गर्जना से कुंती सहसा उछल पड़ीं थीं, उन्हें इस बात का भी ध्यान न रहा कि शिशु भीम गोद में हैं। ऐसे में भीम उछलकर सीधा पर्वतशिला पर गिरे लेकिन उनके गिरने से वह पत्थर की चट्टान चूर-चूर हो गई। यह सब देखने के बाद महाराजा पाण्डु आश्चर्यचकित रह गए।

यह एक ऐसी घटना है जो महाभारत पढ़ने वाले लोगों को आश्चर्यचकित करने वाली है और हमे यकीन है इसे जानने के बाद आपके भी होश उड़ गए होंगे। इस घटना से समझा जा सकता है कि महाबली भीम में कितनी ताकत थी।

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