मां बगलामुखी दिलाती हैं युद्ध में विजय,

मां बगलामुखी दिलाती हैं युद्ध में विजय, पढ़ें कथा
आज मां बगलामुखी की पूजा करने से जीवन से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं और जीवन सकारात्मकता से भर जाता है. आइए पढ़ें मां बगलामुखी की कथा…
आज गुप्त नवरात्रि की अष्टमी पर भक्त मां बगलामुखी की पूजा अर्चना कर रहे हैं. आठवीं महाविद्या बगलामुखी हैं मां को देवी पीताम्बरा भी कहा जाता है. मां बगलामुखी को पीला रंग अति प्रिय है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां बगलामुखी की पूजा करने से शत्रु आपका कुछ बिगाड़ नहीं पाते और सदा पराजित होते हैं. , मां युद्ध में विजय दिलाने और वाक् शक्ति प्रदान करने वाली देवी हैं. आज मां की पूजा करने से जीवन से सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं और जीवन सकारात्मकता से भर जाता है. आइए पढ़ें मां
बगलामुखी की कथा…
मां बगलामुखी की कथा:
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार सतयुग में महाविनाश उत्पन्न करने वाला ब्रह्मांडीय तूफान उत्पन्न हुआ जिससे संपूर्ण विश्व नष्ट होने लगा. इससे चारों ओर हाहाकार मच जाता है और अनेक लोग संकट में पड़ जाते हैं और संसार की रक्षा करना असंभव हो जाता है. यह तूफान सब कुछ नष्ट-भ्रष्ट करता हुआ आगे बढ़ता जा रहा था जिसे देखकर भगवान विष्णुजी चिंतित हो गए.
गुप्त नवरात्रि की अष्टमी पर करें मां बगलामुखी की पूजा,
इस समस्या का कोई हल न पाकर वे भगवान शिव का स्मरण करने लगे. तब भगवान शिव उनसे कहते हैं कि शक्ति के अतिरिक्त अन्य कोई इस विनाश को रोक नहीं सकता अत: आप उनकी शरण में ही जाएं. तब भगवान विष्णु हरिद्रा सरोवर के निकट पहुंचकर कठोर तप करते हैं. भगवान विष्णु ने तप करके महात्रिपुरसुन्दरी को प्रसन्न किया तथा देवी शक्ति उनकी साधना से प्रसन्न हुईं और सौराष्ट्र क्षेत्र की हरिद्रा झील में जलक्रीड़ा करतीं महापीत देवी के हृदय से दिव्य तेज उत्पन्न हुआ.
उस समय चतुर्दशी की रात्रि को देवी बगलामुखी के रूप में प्रकट हुईं. त्र्यैलोक्य स्तम्भिनी महाविद्या भगवती बगलामुखी ने प्रसन्न होकर विष्णुजी को इच्छित वर दिया और तब सृष्टि का विनाश रुक सका. देवी बगलामुखी को बीर रति भी कहा जाता है, क्योंकि देवी स्वयं ब्रह्मास्त्ररूपिणी हैं. इनके शिव को एकवक्त्र महारुद्र कहा जाता है इसीलिए देवी सिद्ध विद्या हैं. तांत्रिक इन्हें स्तंभन की देवी मानते हैं. गृहस्थों के लिए देवी समस्त प्रकार के संशयों का शमन करने वाली हैं.
