मां बाप का प्यार

मां-बाप ने जब गोद में,
बेटी को है पाया था।
देख उसे अपने हाथों से,
सीने से है लगाया था।
उसकी नन्ही मासूम आंखों में,
उसने ख्वाहिश जगाया था।
वह नादान सी लड़की थी,
उससे उम्मीद जगा बैठा।
कोई कमी नहीं रहे उसे,
इतनी लाजो से जो पाला था।
अब वह बड़ी सयानी सी,
मां बाप की लाडली थी।
वह दुनिया से अनजानी,
अपने मन की करते जा रहे थी।
ना रोक-ठोक ,बेझिझक वह,
मां-बाप को भूलते जा रही थी।
ऐसे कदम उठाए उसने,
मां-बाप का सर नीचा था।
एक बार भी ना सोचा उसने,
उसने मां-बाप की उम्मीदों को तोड़ा था।
गलती हुई बेटी से फिर भी,
उसको बाहों में समाया था।
यह और कुछ नहीं दोस्तों,
मां-बाप का बेशुमार प्यार था।
