माता-पिता को दुखी रखने वाला कभी सुखी नहीं रह सकता : अण्णा महाराज 

इन्दौर । संसार के सुख क्षणिक होते हैं, लेकिन पूर्वजों और पितरों के आशीर्वाद से प्राप्त संपत्ति का सुख अनेक पीढियों का उद्धार करता है। संसार में सबसे सुखी व्यक्ति वहीं होता है जिसके पास अपने पूर्वजों और पितरों के आशीर्वाद रूपी फिक्स डिपाजिट होती है। अपने माता-पिता को दुखी रखने वाला कभी सुखी नहीं रह सकता। श्राद्ध पक्ष में पूर्वजों के प्रति की गई सेवा हमारी अनेक पीढि़यों का उद्धार करती है। प्रसन्नता की बात है कि युवा पीढ़ी भी ऐसे अनुष्ठानों में भाग ले रही हैं। प्रकृति का ऋण हम कभी नहीं चुका सकते लेकिन यदि एक पौधा भी लगा सकें तो यह ऋण कम हो सकता है।  
ये प्रेरक विचार हैं  सदगुरू श्री अण्णा महाराज के, जो उन्होंने बड़ा गणपति चौराहा, पीलियाखाल स्थित हंसदास मठ पर हंस पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी रामचरण दास महाराज के सान्निध्य, आचार्य पं. पवन तिवारी के निर्देशन एवं परशुराम महासभा के पं. पवन शर्मा के विशेष आतिथ्य में चल रहे तर्पण अनुष्ठान में व्यक्त किए। प्रारंभ में श्रद्धा सुमन सेवा समिति की ओर से मोहनलाल सोनी, हरि अग्रवाल, राजेंद्र गर्ग, मुरलीधर धामानी, प्रेमस्वरूप खंडेलवाल, घनश्याम वैष्णव, निलेश मंगल,  माणकचंद पोरवाल, एके पुंडरिक, हनुमान प्रसाद सारड़ीवाल,उमेश पुरोहित आदि ने अण्णा महाराज एवं अन्य अतिथियों का स्वागत किया। अण्णा महाराज ने कहा कि देव, गुरू और पिता के साथ चौथा ऋण लोक ऋण होता है। अंतिम संस्कार में जो लकड़ी हमारे काम आती है, उसका ऋण चुकाने के लिए अपने जीवन काल में हम एक एक पौधा ही लगा सकें तो यह ऋण कम हो सकता है। आरती में महामंडलेश्वर स्वामी रामचरण महाराज, अण्णा महाराज के साथ राजेंद्र असावा, भगवती प्रसाद कुमावत, श्रीमती शांतिदेव अग्रवाल, पुष्पा यादव, राजकुमारी मिश्रा, वर्षा जैन, गीता शर्मा सहित तर्पण अनुष्ठान में शामिल सभी साधकों ने भाग लिया। आज भी तर्पण अनुष्ठान में 350 से अधिक साधकों ने भाग लिया। तर्पण के बाद निर्धनों, पशु-पक्षियों के लिए खीर प्रसाद की व्यवस्था भी यहां रखी गई है। साधकों के लिए तर्पण सामग्री, दूध, दुर्वा, तिल्ली, जौ, पुष्प एवं जनेऊ सहित सभी सामग्री समिति की ओर से दी जा रही है। संचालन हरि अग्रवाल ने किया और आभार माना राजेंद्र गर्ग ने। तर्पण के दौरान दिवंगत पूर्वजों, स्वतंत्रता सेनानियों, देश के लिए शहीद हुए जवानों, इन्दौर रियासत के शासकों, देवी अहिल्याबाई तथा गौमाता के लिए भी मोक्ष की कामना के साथ विश्वशांति एवं जन मंगल के लिए अनुष्ठान हुए।
अध्यक्ष मोहनलाल सोनी एवं संयोजक हरि अग्रवाल, राजेंद्र गर्ग ने बताया कि हंसदास मठ पर यह अनुष्ठान सर्वपितृ अमावस्या 28 सितंबर तक प्रातः 8 से 10 बजे तक चलेगा। जिन परिजनों को अपने पितरों के निधन की तिथि ज्ञात है, वे उस तिथि के दिन प्रातः 7.30 बजे तक घर से स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनकर हंसदास मठ पहुंच जाए, जहां समिति की ओर से सभी व्यवस्थाएं निशुल्क रखी गई हैं। जिनके पितरों की तिथि ज्ञात नहीं है, वे सर्वपितृ अमावस्या पर शामिल हो सकते हैं।

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