मोदी के मन में बंगाल और किसान आंदोलन

20 मिनट सिर्फ आंदोलन पर बोले PM, कहा- बंगाल सरकार किसानों तक फायदा नहीं पहुंचने दे रही:

प्रधानमंत्री कार्यालय से महज 30 किमी दूर सिंघु बॉर्डर पर किसान 30 दिन से आंदोलन कर रहे हैं। उन्हें सरकार से सुलह का इंतजार है, लेकिन उन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री को 2500 किमी दूर अरुणाचल और तमिलनाडु में बैठे किसानों का सहारा लेना पड़ रहा है।

शुक्रवार को जब 9 करोड़ किसानों के खातों में 18 हजार करोड़ रुपए की सम्मान निधि ट्रांसफर हो रही थी, तब मोदी का ज्यादा जोर इस पर बात था कि आंदोलन कर रहे किसानों को कैसे कुछ लोग गुमराह कर रहे हैं और बंगाल के किसानों तक किस तरह फायदा नहीं पहुंच पा रहा।

मोदी करीब 80 मिनट बोले। इसमें से 20 मिनट सिर्फ किसान आंदोलन पर बात की। पढ़ें, आंदोलन, कृषि कानून, MSP और कंपनियों की भूमिका पर प्रधानमंत्री की बातें…

1. किसान आंदोलन पर दो बातें

  • आंदोलन में कई भोले-भाले किसान हैं, लेकिन कृषि कानूनों को लेकर झूठ फैलाया जा रहा है। कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं कि नए कृषि कानूनों से उनकी जमीन चली जाएगी।
  • कुछ नेता किसानों के नाम पर अपना एजेंडा चला रहे हैं। किसानों को गुमराह कर रहे हैं। उनके कंधे पर रखकर बंदूक चला रहे हैं। ये लोग हिंसा के आरोपियों को जेल से छुड़वाने की मांग कर रहे हैं।

2. MSP पर दो बातें

  • आंदोलन में शामिल भोले-भाले किसान बताएंगे कि वे भी MSP पर अनाज बेच चुके हैं। बढ़े हुए MSP पर सरकार ने रिकॉर्ड खरीदी की है, वो भी नए कानून बनने के बाद।
  • हमारी सरकार ने प्रयास किया कि देश के किसान को फसल की सही कीमत मिले। हमने लंबे समय से लटकी स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार लागत का डेढ़ गुना MSP किसानों को दिया। पहले कुछ ही फसलों पर MSP मिलती थी, हमने उनकी भी संख्या बढ़ाई।

3. नए कानूनों के छह फायदे गिनाए

  • नए कानूनों के बाद आप मंडी में अपनी उपज बेचना चाहते हैं? आप बेच सकते हैं।
  • आप अपनी उपज दूसरे राज्य में बेचना चाहते हैं? आप बेच सकते हैं।
  • आप एफपीओ के माध्यम से उपज को एक साथ बेचना चाहते हैं? आप बेच सकते हैं।
  • आप बिस्किट, चिप्स, जैम, दूसरे कंज्यूमर उत्पादों की वैल्यू चेन का हिस्सा बनना चाहते हैं? आप ये भी कर सकते हैं।
  • आप अपनी उपज का निर्यात करना चाहते हैं ? आप निर्यात कर सकते हैं।
  • आप उसे व्यापारी को बेचना चाहते हैं? आप बेच सकते हैं।

4. कंपनियों की भूमिका पर दो बातें

  • पंजाब में कई कंपनियां एग्रीमेंट फार्मिंग कर रही हैं। अगर फसल खराब हो गई तो सामने वाला एग्रीमेंट खत्म नहीं कर सकता, लेकिन किसान कभी भी एग्रीमेंट खत्म कर सकता है। पहले एग्रीमेंट तोड़ने पर किसानों पर जुर्माना लगता था, अब किसानों को कुछ नहीं देना पड़ता।
  • अगर कंपनी को फसल से ज्यादा मुनाफा होगा, तो उसे फसल के दाम से अलग बोनस भी किसान को देना होगा। यानी अब रिस्क उठाने का मामला किसान को नहीं, बल्कि कंपनी के जिम्मे है।

5. ममता और विपक्ष पर चार बातें

  • बंगाल में जो किसानों को फायदा नहीं पहुंचने दे रहे, वे दिल्ली आकर किसानों की बात करते हैं। मुझे आज इस बात का अफसोस है कि मेरे पश्चिम बंगाल के 70 लाख से ज्यादा किसान भाई-बहनों को योजना का फायदा नहीं मिल पाया है।
  • जो लोग बंगाल में 30-30 साल तक राज करते थे, वे लोग बंगाल को कहां से कहां ले गए। इन दलों को आजकल APMC मंडियों की बहुत याद आ रही है। लेकिन ये बार-बार भूल जाते हैं कि केरल में APMC मंडियां हैं ही नहीं। केरल में ये लोग कभी आंदोलन नहीं करते।
  • अभी कई जगह स्थानीय निकाय के चुनाव हुए। इसमें किसानों को वोट देना था। किसानों ने आंदोलन के अगुआ लोगों के खिलाफ वोटिंग की।
  • विपक्ष से भी मैं आज नम्रता के साथ कहता हूं कि हमारी सरकार किसानों के मुद्दे पर बात करने के लिए तैयार है, लेकिन बात मुद्दों पर होगी, तर्क और तथ्यों पर होगी।

पांच केंद्रीय मंत्रियों ने भी किसानों से बात की

सरकार की नीतियां किसानों तक पहुंचाने के लिए सरकार के प्रमुख मंत्रियों ने भी अलग-अलग राज्यों में किसानों को संबोधित किया।

मंत्रीकहां किसानों से बात की
अमित शाहमहरौली, दिल्ली
नितिन गडकरीसिलचर, असम
गजेंद्र सिंह शेखावतजैसलमेर, राजस्थान
रविशंकर प्रसादपटना, बिहार
वीके सिंहगाजियाबाद, यूपी

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