मोहन भागवत और मिथुन चक्रवर्ती की भेंट से गर्म हुआ अटकलों का बाजार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को वरिष्ठ सिने अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती के घर जाकर उनसे मुलाकात की। वह करीब दो घंटे उनके साथ रहे। वैसे तो मिथुन चक्रवर्ती ने किसी तरह की राजनीतिक महत्वाकांक्षा से इन्कार किया है।

राज्य ब्यूरो, मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को वरिष्ठ सिने अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती के घर जाकर उनसे मुलाकात की। वह करीब दो घंटे उनके साथ रहे। वैसे तो मिथुन चक्रवर्ती ने किसी तरह की राजनीतिक महत्वाकांक्षा से इन्कार किया है लेकिन बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इस मुलाकात से अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।

मुंबई में अभिनेता के घर पहुंचे संघ प्रमुख, दो घंटे तक रहे उनके साथ

भागवत सोमवार को ही मुंबई गए थे। मंगलवार सुबह वह मिथुन चक्रवर्ती से मिलने उनके मड आइलैंड स्थित आवास पर पहुंचे। वहां उन्होंने सबके साथ नाश्ता किया और पूरे परिवार को नागपुर आने का न्योता भी दिया। बाद में मिथुन ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा कि इस मुलाकात का कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। यह सिर्फ एक पारिवारिक मुलाकात थी।

भागवत से मिथुन के संबंध आध्यात्मिक एवं सामाजिक अधिक रहे

बंगाल चुनाव के कारण भाजपा से जुड़ाव के सवाल पर मिथुन ने कहा कि उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है, ही अब तक उनसे किसी ने संपर्क किया है। उनके अनुसार मोहन भागवत से उनके संबंध आध्यात्मिक एवं सामाजिक अधिक रहे हैं। संघ द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे सामाजिक कार्य भी मिथुन दा को लुभाते रहे हैं।

भागवत और मिथुन कई बार मिल चुके हैं

मोहन भागवत और मिथुन चक्रवर्ती की यह कोई पहली मुलाकात नहीं थी। इससे पहले तीन अक्टूबर, 2019 को उन्होंने नागपुर जाकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय में संघ प्रमुख से मुलाकात की थी। वहां उन्होंने हेडगेवार स्मारक पर जाकर श्रद्धासुमन भी अर्पित किए थे। उसी समय उन्होंने मोहन भागवत को मुंबई आने पर उन्हें अपने घर आने का निमंत्रण दिया था। मिथुन कहते हैं कि दो दिन पहले ही वह लखनऊ से शूटिंग करके लौटे हैं। इसी दौरान भागवत का भी मुंबई आने का कार्यक्रम बना। तभी मोहन भागवत ने उनके घर आने का कार्यक्रम बना डाला।

बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर इस मुलाकात के राजनीतिक अर्थ तलाशे जाने लगे

मिथुन चक्रवर्ती के राजनीतिक इतिहास और बंगाल में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस मुलाकात के राजनीतिक अर्थ तलाशे जाने लगे हैं। बता दें कि मिथुन पहले भी बंगाल की राजनीति से जुड़े रहे हैं। पढ़ाई के दौरान वह कांग्रेस की छात्र शाखा से जुड़े रहे और पढ़ाई पूरी होने के बाद उनका रुझान वामपंथी राजनीति की ओर हो गया था। वह सिर्फ माकपा में सक्रिय हुए, बल्कि नक्सलवादी गुटों से भी जुड़ गए, लेकिन भाई की मौत के बाद उनका नक्सलवाद से मोहभंग हो गया और नक्सलियों से बचने के लिए उन्हें मुंबई का रुख करना पड़ा। मुंबई में उन्हें अभिनय की दुनिया में स्थापित होने का मौका मिला।

मिथुन चक्रवर्ती को सियासत ज्यादा दिन रास नहीं आई

बंगाल में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए ममता बनर्जी ने 2014 में उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनाकर तृणमूल कांग्रेस में सक्रिय करने की कोशिश की, लेकिन सियासत उन्हें ज्यादा दिन रास नहीं आई। दो साल बाद ही उन्होंने खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

 

 

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