राजनीतिक पार्टियों के लिए अबूझ पहेली बनते जा रहे नीतीश कुमार, भावी रुख पर बनाए रखा है सस्पेंस

खास बातें

    भावी रुख पर नीतीश के सस्पेंस से भाजपा सतर्क तो अन्य दल असमंजस में
    विलुप्त की राह पर बढ़ रहे राजद ने दिया नीतीश को बड़ा अवसर
    नेतृत्वहीन विपक्ष की धुरी बनने का विकल्प भी है खुला

लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद बिहार के सीएम नीतीश कुमार विभिन्न दलों के लिए अबूझ पहेली बनते जा रहे हैं। उनके भावी रुख को ले कर जहां भाजपा संतर्क है तो दूसरे दल अजमंजस में हैं। एक तरफ नीतीश राजद के साथ आने के खुले प्रस्ताव को भाव नहीं रहे तो दूसरी ओर भाजपा के मूल एजेंडे से जुड़े तीन तलाक, एनआरसी जैसे मुद्दों से न सिर्फ दूरी दिखा रहे हैं, बल्कि उनकी पार्टी खुल कर हमला करने से भी नहीं चूक रही।
दरअसल राज्य में एकाएक राजद के बेहद बुरी स्थिति पर पहुंच जाने से जदयू को नई ताकत मिली है। नीतीश की नई भूमिका लोकसभा नतीजे आने के तत्काल बाद दिखाई देनी शुरू हो गई। उन्होंने पार्टी के मंत्रिमंडल में प्रतिनिधत्व मामले में विशेष रुचि दिखाई।

इस बीच राजद के फिर से साथ आने के प्रस्ताव को भी अनसुना किया। संसद में सरकार के तीन तलाक बिल का विरोध किया। अनुच्छेद 370 खत्म करने के फैसले से दूर रहे। इसके बाद असम में एनआरसी मामले में पार्टी ने सरकार पर सीधा हमला भी बोला।
आखिर क्या कर रहे हैं नीतीश
राजद के अस्तित्वहीन होने की संभावना के बीच नीतीश ने इस दल के समर्थक अल्पसंख्यक वर्ग के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का साधना शुरू किया। अगड़ों को साधने की अलग रणनीति बनाई। जदयू में नीतीश के करीबियों की माने तो उनके पास अति पिछड़ा और मुसलमान को साथ ले कर अलग राजनीति करने का विकल्प है।

गौरतलब है कि राज्य में मुसलमान मतदाता करीब 17 फीसदी हैं जो राजद के कमजोर होने के बाद असमंजस की स्थिति में हैं।  ऐसी स्थिति में अगर भाजपा-जदयू अगले साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव में साथ रहे भी तो यह नतीश की शर्तों पर होगा। हालांकि भाजपा भी राजद के यादव वोट बैंक पर निगाह जमाए बैठी है।
केंद्रीय राजनीति की महत्वाकांक्षा
लोकसभा चुनाव के बाद विपक्ष में नेतृत्वहीनता की स्थिति है। अगर नीतीश अपने दम पर विधानसभा चुनाव जीते तो वह निर्विवाद रूप से विपक्षी दलों की धुरी बना जाएंगे। जिस प्रकार नीतीश के करीबी और जदयू के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर भाजपा की धुर विरोधी ममता बनर्जी की सलाहकार की भूमिका निभाने के साथ आंधप्रदेश में जगन मोहन रेड्डी सहित कई विपक्षी नेताओं के संपर्क में हैं, उससे इस रणनीति को बल मिल रहा है।

 

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