राधे श्याम के लिए भाग्यश्री ने 5 दिनों में सीखा भरतनाट्यम, बोलीं- एक महीने तक ठीक से चल नहीं पाई

मुंबई। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सिनेमाघरों के बीच टेलीविजन भी अपनी जगह बनाए हुए है। इस माध्यम पर फिल्में रिलीज होना कलाकारों के लिए मायने रखता है। कंगना रनोट और भाग्यश्री अभिनीत फिल्म थलाइवी का वर्ल्ड टीवी प्रीमियर हाल ही में जी सिनेमा पर किया गया। मैंने प्यार किया फिल्म की अभिनेत्री भाग्यश्री के लिए थलाइवी बेहद खास है। लंबे अर्से बाद वह इस फिल्म से दर्शकों के बीच आई हैं। उनसे हुई बातचीत के अंश।
हां, मैंने इस साल को बाहें खोलकर अपनाया है। नए साल का स्वागत भी ऐसे ही करूंगी। जितना प्यार मैं पहले नहीं बटोर पाई थी, वह इस बार बटोरना है। मेरे मन में कोई मलाल नहीं है। मैं खुशनसीब हूं कि इतने सालों के बाद भी उतनी ही इज्जत मुझे मिली है। मैं अभिनय से कई सालों तक दूर रही हूं। अब जब नए तरीके से शुरुआत की है, तो कोशिश है कि वह सब कर सकूं, जो पहले नहीं कर पाई हूं। थलाइवी में मेरा किरदार छोटा था, लेकिन लोगों का प्यार मिला। कोविड के दौरान यह समझ आया कि क्या चीजें जीवन में अहम हैं। मुझे भी इस साल कोरोना हुआ था। इससे पहले मेरे माता-पिता को कोरोना हुआ था। तकलीफ के बाद अब जब सब कुछ करने की आजादी मिली है, तो उसकी अहमियत समझ आती है।
 नई पीढ़ी से सीखने के लिए काफी कुछ है। फिल्मों का पैन इंडिया बनना इसलिए जरूरी है, क्योंकि अब दर्शकों ने भी खुद को किसी भाषा में नहीं बांटा है। मेरे घर में बच्चे तेलुगु, तमिल, मलयालम फिल्में सब टाइटल के साथ देखते हैं। अब अच्छा सिनेमा देखने के लिए भाषा रुकावट नहीं बन रहा है। अगर देखने वाले भाषा को किसी प्रकार की रुकावट नहीं समझते हैं, तो कलाकार क्यों समझे। अगर मौका मिल रहा है, जिससे हम अपना अलग क्रिएटिव साइड दिखा सकते हैं, तो भाषा से दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

Leave a Reply