रायपुर में सैलानियों का पसंदीदा जगह बना ये तालाब, सालों पुरानी मछलियां और कछुए खींच रहे अपनी ओर
रायपुर,छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजधानी रायपुर (Raipur) के सरोना का ऐतिहासिक तालाब इन दिनों सैलानियों का खूब आकर्षित कर रहा है. इस तालाब में वर्षों पुराने कछुए और मछलियों (Tortoise and Fishes) को देखने दूर-दूर से सैलानी आ रहे हैं. इतना ही नहीं इस तालाब में मछलियों और कछुओं को लेकर धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ गई हैं. इसे लोग आस्था का विषय मानने लगे हैं. इसके चलते ही तालाब में कछुओं और मछलियों को पकड़ना और मारना भी लोगों ने छोड़ दिया है.
राजधानी रायपुर (Raipur) के सरोना तालाब (Sarona Pond) का इतिहास काफी पुराना है. जानकारों के अनुसार यह तालाब 250 वर्ष पुराना है. तालाब के मध्य में शिव का मंदिर है. इस तालाब में बड़ी बड़ी मछलियां और वर्षो पुरानें कछुएं है. शंकर मदिंर के पुजारी बजरंग गोश्वामी का कहना है कि पुरानी मान्यता है कि कुछ लोग पहले जब भी इस तालाब की मछली और कछुओं को मारे हैं, तब उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा है. कई लोगों के लिए ये मृत्यु का कारण भी बना है. इसके चलते लोग अब इस तालाब की मछलियां और कछुए मारने छोड़ दिए हैं.
सरोना तालाब पहुंचे पर्यटक विरेन्द्र कुमार साहू का कहना है कि प्राकृतिक सौदंर्य के लिहाज से ये तालाब लोगों को अपनी ओर खींच ले आता है. एक मान्यता के अनुसार लोग अपनी मनोकामना के लिए भी यहां आते हैं. यह तालाब आस्था का केन्द्र बिन्दु भी बन गया है. जीव जंतुओ से प्रेम करनें वाले कछुओं और मछलियों के लिए चारा ले कर भी आते हैं. आम दिनों में भी यहां लोगों की भीड़ लगी रहती है.
