‘लंका अभियान’ से पहले श्रीराम ने यहां किया था शिव पूजन

शास्त्रों की बात , जानें धर्म के साथ लगभग लोग जानते हैं कि त्रेतायुग में श्री राम की पत्नी सीता का उस समय के सबसे शक्तिशाली असुर रावण द्वारा अपहरण किया गया था। जिसके बाद श्री राम ने सीता माता को उसके चगुंल से छुड़ाने के लिए अपने वनवास के आखिरी वर्षों में अन्य असुरों का वध किया तथा पूजन अर्चना किया। आज हम आपको हमेशा की तरह एक इसी कड़ी में एक ऐसे धार्मिक स्थल के बारे में बताने जा रहे हैं,जहां से लंका का अभियान शुरू हुआ था। अर्थात ये वहीं स्थल है जहां पर श्री राम में विजय लंकापति रावण पर विजय पाने की कामना से शिव पूजन किया था।

राम की वनवास यात्रा से जुड़े जिन स्थलों के दर्शन इस बार आपको करवाने जा रहे हैं, उनमें वह स्थान विशेष रूप से शामिल है जहां श्रीराम ने लंका की ओर जाते हुए शिव जी की पूजा की थी। अन्य स्थलों में वह स्थान प्रमुख है जहां लंका जाने के लिए समुद्र में पुल बनाने का पहला प्रयास किया गया था। ये सभी स्थान तमिलनाडु में स्थित हैं।

माना जाता है कि इसी अरण्य में भगवान शिव के डमरू से वेदों का उद्घोष हुआ था। इस नाते इस भूमि का भगवान शिव से विशेष संबंध है इसलिए लंका अभियान पर जाते समय श्रीराम ने यहां उनकी पूजा की थी। अब यहां भगवान शिव का एक अति प्राचीन मंदिर है जिसकी स्थानीय लोगों में काफी मान्यता है। (ग्रंथ उल्लेख : वा.रा. 6/4/9 से आगे पूरे अध्याय मानस 5/34/2 से 5/34/छं 2 तक)

एक लोक कथा के अनुसार श्रीराम ने लंका जाने के लिए कोड़ी करई से समुद्र में पुल बनाना आरम्भ किया था किन्तु किसी कारणवश उन्हें स्थान बदलना पड़ा। करीब स्थित वेदारण्यम से 7 किलोमीटर दूर समुद्र के किनारे जंगल में श्रीराम के चरण चिह्न बनाए गए हैं। (ग्रंथ उल्लेख वा.रा. 6/4/9 से आगे पूरे अध्याय मानस 5/34/2 से 5/34/छं 2 तक)
 

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