लिंगायत का प्रस्ताव अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के हवाले

नई दिल्ली। कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में चर्चा का विषय बने लिंगायत मामले में भाजपा नीत केंद्र सरकार पूरी सावधानी बरत रही है। लिंगायत को अल्पसंख्यक दर्जा देने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को गृह मंत्रालय ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के पास भेजा है। अब वहीं से फैसला होगा कि इसमें क्या किया जाए।
लिंगायत समुदाय से जुड़े वोटरों की तादाद कर्नाटक में लगभग 17 फीसदी है। ये 224 में से सौ सीटों पर जीत-हार तय करने की स्थिति में हमेशा रहते हैं। इन्हें भाजपा का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है। सिद्धारमैया सरकार ने चुनावी गणित को ध्यान में रखकर ही लिंगायतों को अल्पसंख्यक का दर्जा देने की सिफारिश की थी।
हालांकि भाजपा ने शुरू से ही इस मसले पर अपने पत्ते खोलने में सावधानी बरती है। पार्टी यह तो कह रही है कि राज्य सरकार धर्म को राजनीतिक मुद्दा बनाकर गलत कर रही है, लेकिन जिस तरह से गृह मंत्रालय ने राज्य का मसौदा दूसरे संबंधित मंत्रालय के सुपुर्द किया है, उससे साफ है कि मोदी सरकार इस मामले में कोई भी जोखिम नहीं उठाना चाहती।
उधर, कर्नाटक के कानून मंत्री टीबी जयचंद्रा का कहना है कि राज्य की सिफारिश अल्पसंख्यक आयोग की सिफारिश पर आधारित है। हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एचएन नागमोहन दास की सात सदस्यीय समिति ने भी यही सिफारिश की थी। इसका गठन दिसंबर 2017 में किया गया था। मार्च में समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को दी थी।
