लोगों को बाहर निकाले बिना ही टीम ने बिल्डिंग कर दी सील, फिर ऐसे निकले बाहर

अवैध बिल्डिंग पर कार्रवाई करने गई नगर निगम के बिल्डिंग डिपार्टमेंट की टीम ने लोगों को बाहर निकाले बिना ही इमारत सील कर दी। पठानकोट चौक के पास हुई कार्रवाई का पता जब मेयर को चला तो उन्होंने बिल्डिंग डिपार्टमेंट की टीम की क्लास ली और सील खोलने के लिए टीम को वापस भेजा।बिल्डिंग टीम की इस घोर लापरवाही से मेयर जगदीश राजा काफी नाराज दिखे।
पठानकोट चौक के पास जब अवैध बिल्डिंग सील की गई तो बिल्डिंग के पिछले हिस्से में करीब 10 लोग थे। वहां से निकलने का कोई दूसरा रास्ता नहीं था। मेयर के पास इसकी सूचना पहुंची तो मेयर ने अफसरों को तुरंत वापस भेजा। टीम ने करीब दो घंटे बाद जब बिल्डिंग में फंसे लोगों को बाहर निकाला तो मेयर ने राहत की सांस ली।
मेयर ने कहा कि बिल्डिंग मालिक ने एक महीने में बाइलाज के मुताबिक बिल्डिंग ठीक करने की बात मान ली है और सील खोल दी गई है। बुधवार को ही नगर निगम ने दस इमारतें और भी सील कीं। जनहित याचिका पर हाईकोर्ट से जारी नोटिस का जवाब देने से पहले नगर निगम के बिल्डिंग डिपार्टमेंट ने अवैध ईमारतों पर कार्रवाई तेज की है। बुधवार को बिल्डिंग डिपार्टमेंट ने सेक्टर नगर एक से चार के बाबा मोहन दास नगर, लम्मा पिंड चौक, पठानकोट चौक सूरानुस्सी और भट्टा रोड पर इमारतें सील की। यह सारी कार्रवाई एटीपी लखबीर सिंह के निर्देश पर बिल्डिंग इंस्पेक्टर नीरज शर्मा की टीम ने की।नगर निगम ने इससे पहले रामामंडी में तीन कॉलोनियों और सोफी पिंड में एक कॉलोनी पर कार्रवाई की थी।
इसलिए की जा रही कार्रवाई
हाईकोर्ट ने 17 जून को आरटीआइ एक्टिविस्ट सिमरनजीत सिंह की जनहित याचिका पर नगर निगम को नोटिस जारी करके चार हफ्तों में एफिडेविट मांगा है कि अवैध इमारतों पर कार्रवाई का एक्शन प्लान दें। कोर्ट ने ये भी पूछा था कि अब तक कितनी अवैध इमारतों पर कार्रवाई हुई। आरटीआइ एक्टिविस्ट ने कोर्ट को 300 से ज्यादा इमारतों की लिस्ट भी दी है। इनमें वह 93 इमारतें भी शामिल हैं जिनके खिलाफ लोकल बाडी मंत्री ने कार्रवाई की थी।
कोर्ट जाने से पहले खोली गई इमारतें दोबारा सील होंगी
हाईकोर्ट के नोटिस के बाद निगम का बिल्डिंग डिपार्टमेंट उन इमारतों को भी दोबारा सील करने की तैयारी में है, जिन्हें किसी न किसी दबाव और एफिडेविट लेकर खोला गया था। बुधवार को जब एक पूर्व पार्षद एक इमारत की सील खोलने के लिए सिफारिश करने आया तो उसे साफ मना कर दिया गया। साथ ही कहा कि जिन इमारतों की सील खोली गई थी उन्हें दोबारा सील करना पड़ेगा। कोर्ट में जाने से पहले कार्रवाई पूरी करनी है। 93 इमारतों के खिलाफ लोकल बाडी मंत्री को शिकायत की गई थी। इन्हें पहले सील कर दिया गया था, लेकिन बाद में कुछ को राहत दी गई थी।
विधायकों को अफसरों की कार्रवाई पर एतराज
बिना मंजूरी बनी इमारतों पर कार्रवाई पर विधायकों को एतराज है। दो दिन पहले सांसद और मेयर के साथ हुई मीटिंग में भी विधायकों ने इस पर एतराज जताया था। विधायक राजिंदर बेरी ने भी कहा था कि बिल्डिंग डिपार्टमेंट के अफसर पुराने समय में बनीं इमारतों पर कार्रवाई कर रहे हैं। जहां नई बिल्डिंग बनी हैं और नियम टूटे हैं वहां पर कार्रवाई हो लेकिन लोगों को बिना बात परेशान न किया जाए। विधायकों की राय है कि बिना मंजूरी बनी बिल्डिंग को मंजूर करने के लिए आई वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी को भी सरल किया जाए और फीस कम भी कम हो।
मंत्री से मुद्दा उठाएंगे मेयर, पेंडिंग ग्रांट भी मांगेंगे
नए लोकल बॉडी मंत्री ब्रहम मोहिंदरा से मेयरों की मीटिंग चंडीगढ़ में होगी। इसके लिए मेयर देर रात तक एजेंडा तैयार करते रहे। मेयर डवलपमेंट के ग्रांट की डिमांड भी करेंगे और पिछले समय में जारी हुई पॉलिसियों को रिव्यू करने की मांग भी करेंगे। मेयर ने कहा कि नगर निगम की जो भी जरूरतें है उसकी लिस्ट बनवा रहे हैं। इमारतों पर कार्रवाई को लेकर भी लोग परेशान हैं। वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी से भी लोग खुश नहीं हैं। लोकल बॉडी मंत्री से मांग करेंगे कि पब्लिक हित में पॉलिसी में बदलाव किया जाए। फीस कम करने और नियम ठीक करने से निगम के पास इतने फंड आ जाएंगे कि डवलपमेंट में कमी नहीं रहेगी। मेयर ने कहा कि सरकार से पीआईडीबी की ग्रांट के पेंडिंग 20 करोड़ रुपये जल्द रिलीज करने की मांग करेंगे। सरकार की तरफ एक्साइज ड्यूटी के 20 15 करोड़, बिजली पर म्यूनिसिपल टैक्स के 14 करोड़ रुपये भी पेंडिंग हैं। लोकल बॉडी मंत्री से मांग करेंगे कि ऐसा सिस्टम बना दिया जाए कि तीन महीने बाद एक्साइज और बिजली पर टैक्स का रुपया निगम को ट्रांसफर हो जाए।
