विधानसभा में भी ‘करा नाटक ‘- विरोध में विपक्षी दल भाजपा सदस्य रातभर सदन में धरना देने बैठे

बेंगलुरू। कर्नाटक में सरकार-विपक्ष का राजनीतिक नाटक गुरुवार को भी जारी रहा। इस बीच, जदएस और कांग्रेस गठबंधन के मुख्यमंत्री  एचडी कुमारस्वामी को विधानसभा में विश्वास मत साबित करने के लिए एक दिन का वक्त मिला है। विधानसभा में विश्वास मत पर साढ़े सात घंटे चली बहस के बाद स्पीकर रमेश कुमार ने सदन की कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा ने हमारे विधायक श्रीमंत पाटिल को अगवा कर लिया। वहीं, विश्वास मत पर सत्ता पक्ष के भाषणों पर भाजपा के सदस्य बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि स्पीकर रमेश कुमार विश्वास मत को टालना चाहते हैं। विधायकों ने इस संबंध में राज्यपाल वजूभाई वाला को ज्ञापन भी सौंपा। राज्यपाल ने स्पीकर से कहा कि वे आज ही विश्वास मत कराए जाने पर विचार करें। कार्यवाही स्थगित होने के बाद भाजपा विधायकों ने रातभर सदन में ही धरना देने का फैसला किया। 

5 विधायक रहेे गैर-हाजिर
विश्वास मत के दौरान विधानसभा से 5 विधायक गैर-हाजिर रहे। इनमें 2 कांग्रेस, 1 बसपा और और 2 निर्दलीय विधायक थे। 15 गैर-हाजिर, 15 बागी विधायकों के अलावा स्पीकर को हटाकर सदन की संख्या 203 हो गई। इस स्थिति में बहुमत साबित करने का आंकड़ा 102 हो गया। लेकिन, कांग्रेस-जेडीएस के पास 116 के मुकाबले विधायकों का आंकड़ा 98 रह गया था, जबकि भाजपा के पास 105। 

राज्यपाल ने स्पीकर को विश्वास मत पर विचार को कहा
विश्वास मत साबित करने में देरी को देखते हुए भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल वजूभाई वाला से मुलाकात की। उन्होंने राज्यपाल से अपील की कि विश्वास मत गुरुवार को ही साबित किया जाए। सदन में भी येदियुरप्पा ने कहा कि भले ही रात में 12 बज जाएं, लेकिन कुमारस्वामी को विश्वास मत आज ही साबित करना चाहिए। राज्यपाल ने स्पीकर से कहा कि वे शुक्रवार को ही विश्वास मत कराए जाने पर विचार करें। 

आगे क्या?
कर्नाटक में स्पीकर को छोड़कर विधायकों की संख्या 223 है। बहुमत के लिए 112 विधायकों का समर्थन जरूरी है। कांग्रेस (78), जेडीएस (37) और बसपा (1) की मदद से कुमारस्वामी सरकार के पास अभी 116 विधायक हैं, लेकिन 16 विधायक बागी होकर विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। अगर ये विधायक विश्वास मत के दौरान अनुपस्थित रहते हैं तो सदन में सदस्य संख्या 207 रह जाएगी। बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ा 104 का हो जाएगा। लेकिन, बागियों की अनुपस्थिति में सरकार के पक्ष में केवल 100 वोट पड़ेंगे और सरकार गिर जाएगी।

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