शिवराज ने जिसे ब्लैक लिस्टेड किया उसी कंपनी को कमलनाथ ने दिया था बड़ा काम

शिवराज ने जिसे ब्लैक लिस्टेड किया उसी कंपनी को कमलनाथ ने दिया था बड़ा काम
550 करोड़ रुपए की खरगोन उद्वहन योजना।
सीमेंट की बजाय पीवीसी पाइप डालने वाली ब्लैक लिस्टेड कंपनी काे कराया 77% भुगतान
33140 हैक्टे. में सिंचाई होती तो 5 साल में किसानों को सालाना 331 करोड़ का मिलता फायदा
नर्मदा की नहरों से क्षेत्र में खुशहाली के साथ भ्रष्टाचार की भी जड़ें भी पनप रही हैं। 550 करोड़ लागत की अधूरी खरगोन उद्वहन सिंचाई योजना का मेसर्स मेघा इंजीनियरिंग हैदराबाद को 77 प्रतिशत यानी 425 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया। किसान संगठनों के कड़े विरोध पर शिवराजसिंह चौहान की सरकार ने उसे ब्लैक लिस्टेड कर 55 करोड़ की धरोहर राशि राजसात कर ली। उसी कंपनी को पिछली कमलनाथ सरकार ने 4 हजार करोड़ लागत की कालीसिंध फेज-2 का काम सौंप दिया। खरगोन सिंचाई योजना 2018 में पूरी होना थी। इस पाइप निर्माण कंपनी ने अंडरग्राउंड सीमेंट लाइन की जगह बिना सीमेंट बेस की पाइपलाइन डाल दी।
पाइप दबाव झेल नहीं पाने से लीकेज होकर जगह-जगह फूटते गए। इससे सालाना 331 करोड़ रुपए का लाभ किसानों को फसलों में मिलने लग जाता। मैदानी हकीकत है कि अधूरी व अनुपयोगी संरचनाएं खेतों में खड़ी है। टर्मिनेट करने से पहले भुगतान हो चुका था। जबकि मैदानी हकीकत है कि कुंदा, वेदा व अवर नदी पर न स्टाॅपडेम बने और न ही पुनासा डेम से पंप हाउस तक स्थायी ट्रांसमिशन लाइन डाली गई। अभी भी खेतों में कुंडियों तक पानी नहीं पहुंचा। पिपलाई में जलाशय की बजाय टैंक बनाकर काम छोड़ दिया।
जलाशय की जगह बनाया टैंक : 2023 तक 110 करोड़ की अतिरिक्त लागत से होगा काम
ये है पिपलई जलाशय का स्पॉट। क्षेत्र में सैकड़ों कुंडियों के पाइप में जंग चढ़ गई है। खरगोन उद्वहन सिंचाई योजना में यहां 450 हैक्टेयर रकबे में जलाशय भी बनना था। क्षेत्र के किसानों की जमीन अधिग्रहित कर मुआवजा दे दिया गया है। पुरानी कंपनी 10 वर्गफीट का टैंक खड़ाकर भाग गई। इंदिरासागर नहर से नर्मदा जल लिफ्ट कर यहां डाला जाएगा।
दबाव से कुंडियों के माध्यम से सिंचाई होगी। नर्मदा लाओ किसान बचाओ समिति अध्यक्ष जितेंद्र यादव बताते हैं पीवीसी लाइन दबाव नहीं झेल पाई। बंद प्रोजेक्ट को 110 करोड़ की नई मंजूरी मिली है। फलौदी कंस्ट्रक्शन जलाशय का काम कराएगा। आर-1 के पिपलई टैंक की किसान निगरानी करेंगे।
जानिए, सालाना 331 करोड़ का किसानों को हो रहा नुकसान
नर्मदा जल से 2018 तक खरगोन, भीकनगांव व कसरावद विधानसभा के 18536 किसानों के 33140 हैक्टेयर रकबे में सिंचाई व 152 गांवाें में पेयजल मिलना था। किसान प्रतिनिधि बताते हैं 2018 तक सिंचाई लाभ मिलता तो प्रति हैक्टेयर एक लाख रु. हैक्टेयर के हिसाब से 331 करोड़ सालाना लाभ होता। अब दावा है 2023 तक सिंचाई का पानी मिलेगा। लेकिन इन पांच साल में 331 करोड़ रुपए के मुनाफे का किसानों को नुकसान हो गया।
नर्मदा नदी की नहरों में किस तरह फूट रही भ्रष्टाचार की धार
ब्लैक लिस्टेड कंपनी को क्यों दिया करोड़ों का काम
2018 में पाइप लीकेज की शिकायतों पर शिवराज सरकार ने मेसर्स मेघा इंजीनियरिंग प्रालि हैदराबाद को टर्मिनेट कर ब्लैक लिस्टेड किया। निर्माण एजेंसी के 55 करोड़ रुपए रुपए की धरोहर राजसात की। 2020 में कमलनाथ सरकार में इसी कंपनी को कालीसिंध फेज-2 का काम सौंप दिया। मप्र ऊर्जा विकास निगम पूर्व अध्यक्ष विजेंद्र सिंह सिसोदिया ने कहा कि खरगोन उद्वहन सिंचाई परियोजना में लापरवाही पर ब्लैक लिस्टेड मेघा इंजीनियरिंग कंपनी हैदराबाद को 4000 करोड़ लागत के कालीसिंध फेज-2 का काम सौंपकर कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने जल्दबाजी दिखाई। कमलनाथ को किसानों को जवाब देना चाहिए कि उन्होंने ऐसा क्यों किया।
पाइप : लीकेज में सिर्फ 25% क्षमता से चल पाते हैं पंप
गुणवत्ता के पाइप न डालने से कई जगह लीकेज होने से किसानों को पूरी क्षमता से सिंचाई में पानी नहीं मिल रहा है। पंप हाउस के पंप 25 प्रतिशत क्षमता से ही चल रहे हैं। ज्यादा दबाव लाइन नहीं झेल पा रही है।
बिजली : 55 करोड़ रुपए की नहीं डाली ट्रांसमिशन लाइन
लगभग 55 करोड़ की लागत से पुनासा डेम में बनने वाली ट्रांसमिशन लाइन का काम नहीं किया। योजना में बने बीआर-1 में लीकेज के कारण जलस्तर मैंटेन करने में अतिरिक्त पंपिंग में बिजली खर्च हो रही है।
सड़क : गुणवत्ताहीन निर्माण हुआ
सिंचाई योजना जहां पहुंचना है वहां सड़कों का निर्माण गुणवत्ताहीन है। अब जर्जर हो चुकी हैं। ग्रामीणों में आवागमन का लाभ नहीं मिल रहा है।
पेयजल : नहीं बनाए गए दो पुल
दो नदियों पर पुल नहीं बनाए। खरगोन शहर के पेयजल का बैराज नहीं बनाया। 152 गांवों की पेयजल टंकियां अधूरी व जीर्णशीर्ण हैं।
अभी 2 और साल करना होगा इंतजार
पुरानी कंपनी के अधूरे काम को पूरा करने में नई कंपनी को 2 साल लगेंगे। अब किसानों की निगरानी में काम शुरू कर दिया गया है। बीआर-2 व बीआर-3 तक बाकी के काम पूरे कराएंगे।
2 साल में काम पूरा करना है
पुराना मामला है। ब्लैक लिस्टेड कंपनियों की मॉनीटरिंग शासन स्तर पर होती है। तब 55 करोड़ धरोहर राशि राजसात हुई थी। अब नया टेंडर हुआ है। 2 साल में काम पूरा करना है। पिपलई में टैंक की जगह जलाशय बनाएंगे।
एमएस परस्ते, कार्यपालन यंत्री, नर्मदा विकास प्राधिकरण खरगोन संभाग
अब काम नए सिरे से हो रहा
बेस बनाकर सीमेंट पाइपलाइन बनाना था लेकिन निर्माण कंपनी ने पीवीसी लाइन डाल दिए। जिससे दबाव में बार-बार लीकेज हो रहे थे। कुंदा, वेदा व अवर नदी पर स्टाॅपडेम भी नहीं बनाए गए। लगातार आंदोलन पर अब काम नए सिरे से हो रहा है। -जितेंद्र यादव, अध्यक्ष नहर लाओ किसान बचाओ समिति
