श्रद्धा पर्व के अनुष्ठानों में अहिल्या माता गौशाला पर बढ़ रही गौभक्तों की संख्या 

इन्दौर । केशरबाग रोड़ स्थित प्राचीन अहिल्या माता गौशाला पर चल रहे श्रद्धा पर्व में प्रतिदिन गौभक्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। पितृ पक्ष में श्राद्ध की विशेष महिमा होने से सैकड़ों परिवार गौशाला परिसर आकर अपने दिवंगत परिजनों की स्मृति में तर्पण एवं गौवंश की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। स्मृति वन योजना के तहत अब तक 20 पौधे रोपे जा चुके हैं। गौशाला स्थित सप्त गौमाता मंदिर पर भी बड़ी संख्या में आज लोगों ने सपरिवार पहंुचकर गायों को उनके प्रिय व्यंजनों का भोग लगाया।
गौशाला प्रबंध समिति के अध्यक्ष रवि सेठी, सचिव पुष्पेंद्र धनोतिया एवं संयोजक सी.के. अग्रवाल ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में गौशाला पर आचार्य पं. भूपेंद्र तिवारी के निर्देशन में आज भी अनेक परिजनों ने दिवंगत पितरों के लिए तर्पण अनुष्ठान में भाग लिया। यहां शास्त्रोक्त विधि से प्रतिदिन सुबह 8.30 से 12.30 बजे तक पितरों के तर्पण की निशुल्क व्यवस्था रखी गई है। आज भी लगभग 300 साधकों ने गौशाला पहुंचकर तर्पण अनुष्ठान में भाग लिया। तर्पण की समस्त सामग्री गौशाला पर निशुल्क उपलब्घ है। इसी तरह गौवंश की पूजा के लिए भी सुबह से दोपहर तक अनेक परिवार आए तथा गायों को उनके प्रिय व्यंजनों का भोग लगाया। गौशाला में निर्मित प्रदेश के एकमात्र सप्त गौमाता मंदिर में गौवंश की परिक्रमा और पूजन का क्रम भी पहले दिन से ही चल रहा है। मान्यता है कि गर्भवती महिलाएं इस मंदिर की परिक्रमा करती हैं तो उनकी होने वाली संतान स्वस्थ और हष्ट-पुष्ट होती हैं।
उन्होंने बताया कि गौशाला प्रबंधन द्वारा स्मृति वन योजना भी लागू की गई है। इसके तहत दिवंगत परिजनों या स्नेहीजनों की स्मृति में गौशाला परिसर में पौधरोपण किया जा रहा है। मात्र 1100 रू. की सहयोग राशि देकर अब तक 25 पौधे यहां रोपे गए हैं। इनकी देखभाल का जिम्मा गौशाला प्रबंधन के पास रहेगा। इसी तरह तर्पण करने वालों के लिए भी गौशाला पर सात्विक भोजन की व्यवस्था रखी गई है। अनेक श्रद्धालु यहां ब्राम्हणों को भोजन करा रहे हैं या उनका भोजन लेकर आश्रमों मंे जा रहे हैं। यह सुविधा भी पूरे श्राद्ध पक्ष में 28 सितंबर तक उपलब्ध रहेगी। भोजन के लिए एक दिन पूर्व सूचना देना जरूरी होगा। गौशाला पर गौवंश के लिए पौष्टिक आहार, हरी एवं सूखी घास तथा गुड़, दलिया निःशुल्क उपलब्ध है।

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