सहायक आबकारी आयुक्त पर पद दुरप्रयोग और गबन का आरोप पर हुई निलंबन कारवाही

- निज सचिव और उपसचिव की साठगांठ ने आरोपी को पहुँचाया नियम लाभ।
- ग्वलियर में पिछले 5 बर्ष से पदस्थ है सहायक आबकारी आयुक्त संदीप शर्मा।
- विभाग ने गंभीर आरोप में र्आथिक पद दुरप्रयोग के साथ आर्थिक अनियमितता का लगा आरोप।
- आरोपी को हितबद्ध तरीके से हुए निलंबन कारवाही।
- आदेश में नियम 9 की जगह नियम 19 की हुई कारवाही।
- शासन प्रशासन की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से दिया जांच के आदेश।
- नियम 19 के तहत आदेश में कोर्ट से स्टे मिलने का है प्रावधान ।
भोपाल। आबकारी विभाग में प्रमुख सचिव एवं आयुक्त की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से सहायक आबकारी आयुक्त की मिलीभगत का मामला आज सामने आया जिसमे सहायक आबकारी आयुक्त संदीप शर्मा ग्वालियर जिले में लंबे समय से शराब ठेकेदारों से मिलीभगत कर उन्हें लाभ पहुचाने का काम कर रहा था जिससे शासन को करोडो रूपये की हानि हुयी, जिसके चलते आज विभाग ने शर्मा पर निलम्बन की कार्यवाही की।
हम आपको बता दें सरल साफ स्वच्छ छवि रखने वाले वाणिज्य कर मंत्री ब्रजेंद्र सिंह राठौर को हाल ही में नई सरकार में यह विभाग दिया गया है, जिसकी जिम्मेदारी मिलने के 76 दिन में ही मंत्री द्वारा भ्रष्टाचार कर रहे अधिकारियों पर गाज गिरनी शुरू हो गई और शासन को लगातार सफल आबकारी नीति देने से जनहित के साथ राजस्व लाभ मिला लेकिन भ्रष्टाचार में लिप्त विभागीय अधिकारी को ये बात नागावार गुजरी और मंत्री ब्रजेंद्र सिंह की छवि धूमिल करने के लिए विभागीय भ्रष्ट अधिकारियों ने लामबंद होकर मंत्री की छवि धूमिल करने का मोर्चा खोल दिया।
सूत्रों की माने तो पिछली सरकार में पूर्व मंत्री जयंत मलैया के निज सहायक रह चुके अमीर बेग , इस पूरे गिरोह के छुपे सरगना निकले, जो वर्तमान में मंत्री ब्रजेंद्र सिंह के निज सहायक है पीएस और मंत्री छवि धूमिल करने के उद्देश्य से आरोपी साथी संदीप शर्मा से पुरानी यारी निभाई और साथ ही अपने पुराने वित्त विभाग से उपसचिव बनी अदिती त्रिपाठी से मिलकर नियम सिथिल करते हुए नियम 9 की जगह नियम 19 के तहत निलंबन की कारवाही की गई जिससे विभागीय जांच में आरोपी बने संदीप शर्मा को कोर्ट से आसानी से स्टे मिल सके और शासन प्रशासन की छवि धूमिल हो सके ।
सूत्रों की माने तो इसके लिए मंत्री निज सचिव के माध्यम से लाखों रुपए के लेन देन का मामला आरोपियों से लेना बताया गया जिसके चलते विभागीय कारवाही को सिथिल किया गया चूंकि आरोपी शर्मा के पिता ग्वालियर हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील रह चुके हैं,
सूत्र बताते है कि मामला पीएस और मंत्री के संज्ञान में आने के बाद सिलसिले भ्रस्टाचारियो पर सिलसिले बार कारवाही होगी जो आचार सहिंता के चलते अवरुद्ध है जिसमे मुख्य रूप से शामिल मंत्री बंगले में निज सचिव के पास आने वाली गोपनीय फाइलें जिससे विभागीय अनिमितता हुई प्रमुख होगी है ।।
