साजिश या बदमाशों की हिमाकत ! किसके इशारे पर हुआ बहरोड़ थाने पर AK-47 से हमला ?

अलवर (Alwar) जिले के बहरोड़ पुलिस थाने (Bahrod police station) पर बदमाशों द्वारा AK-47 से किए गए हमले ने कई सवाल (Question) खड़े कर दिए हैं. बहरोड़ पुलिस द्वारा नगदी और हथियार (Cash and weapon) मिलने पर पकड़े गए विक्रम उर्फ पपला (Vikram alias Papala) के बारे में केवल पुलिस और पपला ही जानते थे. इसकी जानकारी किसी तीसरे व्यक्ति (Third person) को थी ही नहीं. यहां तक कि पपला के पकड़े जाने के बाद खुद पुलिस उसे नहीं पहचान पाई थी तो फिर किसकी मुखबिरी (Informant) पर बहरोड़ थाने पर सुनियोजित हमला (Planned attack) किया गया ? पुलिस ने पैसे के साथ पपला का फोटो और वीडियो भी बनाया था, जिसमें उसके पास से 31.90 लाख रुपए बरामद किए गए थे.
यूं चला था घटनाक्रम
बहरोड़ थाना पुलिस ने गुरुवार देर रात नाकाबंदी के दौरान एक स्कार्पियो गाड़ी को रुकवाया था. गाड़ी की तलाश ली तो उसमें एक युवक के साथ 31.90 लाख रुपए और हथियार मिले. इसके बाद पुलिस ने युवक से पूछताछ की तो उसने अपना नाम साहिल बताया और पैसे प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाने के लिए लाने की बात कही. पुलिस ने उसे शुक्रवार को तड़के करीब 4 बजे थाने के लॉकअप में बंद कर दिया और बेफिक्र हो गई. इससे पहले पुलिस ने पपला के पास से बरामद किए 31.90 लाख रुपयों के साथ वीडियो भी बनाया. सुबह तक यह बात किसी बाहर के व्यक्ति को पता नहीं थी. लेकिन उसके महज करीब साढ़े 4-5 घंटे के बाद सुबह 8.30 से 9 बजे के बीच ही पपला के साथियों ने AK-47 से थाने पर हमला कर उसे छुड़वा लिया.
पपला गैंग को पल-पल का अपडेट मिलता रहा
सूत्रों की मानें तो विक्रम उर्फ पपला को लॉकअप में बंद करने के बाद उसकी गैंग के बदमाशों को बहरोड़ थाने से मुखबिरी मिली कि उनकी गैंग का सरगना पुलिस थाने में बंद है. गैंग के बदमाशों के लिए मुखबिरी कर रहे बहरोड़ थाने से जुड़े उनके मुखबिर पल-पल की अपडेट दे रहे थे. इसके बाद गैंग को वारदात के लिए वह समय बताया गया जब सबसे कम व्यक्ति पुलिस थाने में ऑन ड्यूटी रहते हैं.
कौन है मुखबिर ?
सुबह रात्रि गश्त के बाद कुछ पुलिसकर्मी सो रहे थे. कुछ पुलिसकर्मी अपने नहाने धोने में व्यस्त थे. किसी के पास हथियार मौजूद नहीं थे. उसी समय पपला गैंग ने हमला बोला. यह सब गैंग की मुखबिर के इशारे पर हुआ. आखिर यह मुखबिर कौन है ? पुलिस अब इसकी पड़ताल में जुटी है.
