हनी ट्रैप केस से खुलासाः इंदौर नगर निगम में सिर्फ हरभजन नहीं, लंबे समय से जमे हैं इतने अधिकारी

इंदौर. हनी ट्रैप मामले (Honey Trap Case) में फंसे नगर निगम इंदौर के निलंबित इंजीनियर हरभजन सिंह (IMC engineer Harbhajan Singh) को पहले निगम से तो अब इंदौर से भी बाहर करने की मांग जोर पकड़ने लगी है. इंदौर की महापौर मालिनी गौड़ और निगम में नेता प्रतिपक्ष ने सीएम कमलनाथ से यह मांग की है. नगर निगम की नेता प्रतिपक्ष फौजिया शेख अलीम और मेयर मालिनी गौड़ (Indore Mayor) समेत नगर निगम के पार्षदों ने हरभजन सिंह को नौकरी से बर्खास्त कर इंदौर से हटाने के पक्ष में आवाज बुलंद की है. इसके साथ ही इन लोगों ने इंदौर नगर निगम (Indore Municipal Corporation) में प्रतिनियुक्ति पर जमे 17 दूसरे अधिकारियों को भी उनके मूल विभाग में भेजने की मांग की है.
भ्रष्टाचार का आरोप
हनी ट्रैप मामला उजागर होने के बाद सरकार ने हरभजन सिंह को निलंबित कर पंपिंग स्टेशन जलूद भेज दिया है, लेकिन अब उन्हें वहां से भी हटाने की मांग हो रही है. मेयर मालिनी गौड़ का कहना है कि हरभजन सिंह के क्रियाकलापों ने कभी भी नगर निगम का नाम ऊंचा नहीं किया. उन्होंने कहा, 'स्वच्छता में तीन बार अव्वल आकर इंदौर नगर निगम ने देश में जो नाम कमाया था, उसे हरभजन सिंह के क्रियाकलापों ने धूमिल कर दिया है. उनको इंदौर से बाहर कर देना चाहिए.' इंदौर महापौर के अलावा सभापति, एमआईसी सदस्य, नेता प्रतिपक्ष और पार्षदों ने भी हरभजन सिंह को इंदौर से हटाने की मांग की है.
22 साल पहले आए इंदौर
नगरीय प्रशासन विभाग से नौकरी शुरू करने वाले हरभजन सिंह रीवा, सतना नगर निगम और भोपाल विकास प्राधिकरण में रहने के बाद करीब 22 साल पहले 1997 में इंदौर पहुंचे थे. उन्हें नगर निगम में सिटी इंजीनियर के पद पर प्रतिनियुक्ति दी गई. यहां रहते हुए हरभजन के पास इंदौर में चल रहे बड़े-बड़े प्रोजेक्ट का काम आया, जिसकी बदौलत उन्होंने काफी नाम व शोहरत कमाया. वे लंबे समय तक नक्शा शाखा में रहे. 2004 में तत्कालीन मेयर कैलाश विजयवर्गीय से विवाद के बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया. बाद में उमाशशि शर्मा के महापौर बनते ही वे फिर बिल्डिंग परमीशन शाखा में आ गए. जेएनएनयूआरएम में उन्हें सीवेज प्रोजेक्ट का प्रभारी बनाया गया. हरभजन सिंह हाउसिंग फॉर ऑल प्रोजेक्ट के इंचार्ज भी रहे. आरोप है कि शहर की अधिकतर विवादित बिल्डिंग्स की परमिशन हरभजन सिंह ने ही दी. प्रदेश में सरकार बदलने के बाद भी हरभजन का रसूख नहीं बदला. नगर निगम के वरिष्ठ पार्षद बलराम वर्मा का कहना है कि हरभजन ने अपने पद का दुरुपयोग कर नगर निगम का दोहन किया है, उनको नौकरी से बर्खास्त कर नगर निगम के पैसे की वसूली करना चाहिए.
निगम में 17 और ऐसे अधिकारी
नगर निगम की नेता प्रतिपक्ष फौजिया शेख अलीम ने सीएम कमलनाथ और नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह को इंजीनियर हरभजन सिंह को हटाने की बाबत पत्र लिखा है. पत्र में अलीम ने कहा है, 'नगर निगम के निलंबित इंजीनियर हरभजन सिंह के बारे में जिस तरह की बातें सामने आई हैं, उसके बाद ऐसे अफसर के लिए निगम में कोई जगह नहीं है. उन्हें नगर निगम के किसी भी ऑफिस में घुसने नहीं दिया जाएगा, भले ही उनको सस्पेंड कर दिया गया हो.' शेख अलीम ने इस बात की जांच की भी मांग की है कि हरभजन ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अब तक किस-किस को क्या-क्या फायदा पहुंचाया. हरभजन के अलावा फौजिया शेख अलीम ने इंदौर नगर निगम के 17 और अधिकारियों को हटाने की मांग की है. ये अधिकारी भी लंबे समय से नगर निगम में प्रतिनियुक्ति पर जमे हुए हैं. उन्होंने ऐसे अधिकारियों की सूची नगरीय प्रशासन मंत्री को भेजी है. उनका कहना है कि प्रतिनियुक्ति पर लंबे समय से जमे अफसरों को उनके मूल विभाग में भेजा जाए.
इन अफसरों की सूची भेजी
क्रं. नाम पद कार्यकाल
1. प्रतीक चतुर्वेदी सहायक यंत्री 21 साल
2.नंदकिशोर मालवीय सहायक यंत्री 21 साल
3. अवधेश जैन उपयंत्री 18 साल
4. असित खरे सहायक यंत्री 12 साल
5.सईद खान क्लर्क 11 साल
6. प्रकाशचन्द जैन अधीक्षण यंत्री 11 साल
7. डॉ. नटवर शारडा हेल्थ ऑफिसर 11 साल
8.डॉ. अखिलेश उपाध्याय पशु चिकित्सा अधिकारी 9 साल
9. नरेन्द्र शर्मा उपायुक्त 8 साल
10. महेश शर्मा सहायक यंत्री 8 साल
11कैलाश चौधरी कार्यपालन यंत्री 8 साल
12. बीआर लोधी कार्यपालन यंत्री 7 साल
13.महेन्द्रसिंह चौहान उपायुक्त 7 साल
14. आरती खेड़ेकर सहायक आयुक्त 7 साल
15.नरेश किशनानी स्टेनो टायपिस्ट 7 साल
16.नीरजा राजभट्ट सहायक आयुक्त 5 साल
17.सुमित अस्थाना उपयंत्री 5 साल
