हम नहीं तो तुम भी नहीं, सूरत में कांग्रेस को पाटीदारों की नाराजगी महंगी पड़ी

सूरत | गुजरात के 6 नगर निगम चुनावों में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया है| भावनगर और जामनगर में कांग्रेस सिंगल डिजिट में सिमट गई और सूरत में वह खाता भी नहीं खोल पाई| सूरत में पाटीदारों को नाराज करना कांग्रेस को महंगा पड़ गया| यदि पाटीदार आंदोलन समिति (पास) से किया वादा कांग्रेस ने निभाया होता तो सूरत में ऐसी दुर्गति नहीं होती| पास ने सूरत नगर निगम के चुनाव में धार्मिक मालविया और विलास धोराजिया के लिए टिकट मांगा था| विलास धोराजिया एडवोकेट संजय धोराजिया की पत्नी है, जो पास कार्यकर्ताओं के खिलाफ चल रहे मुकद्दमों की पैरवी करते हैं| कांग्रेस ने धार्मिक मालविया और विलास धोराजिया को उम्मीदवार बनाने का पक्का वादा किया था और इसके लिए दोनों ने तैयारी भी कर ली थी| धार्मिक मालविया तो नामांकन दाखिल करने कचहरी भी पहुंच गए थे| लेकिन अंतिम समय में विलास धोराजिया को टिकट नहीं मिलने से धार्मिक मालविया ने चुनाव लड़ने से कर दिया| कांग्रेस ने धार्मिक मालविया को मेंडेट दिया, परंतु विलास धोराजिया को नहीं| पास ने कांग्रेस पर पाटीदारों से विश्वासघात करने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ अभियान छेड़ दिया| पाटीदार बहुल क्षेत्रों में घूम घूम कर पास कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस और भाजपा दोनों को वोट नहीं देने की अपील की| इसका असर भी हुआ और पाटीदार इलाकों की सीटों पर आप उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की| विलास धोराजिया को टिकट नहीं देने का कांग्रेस का फैसला उसी के लिए घातक बन गया और सूरत नगर निगम कांग्रेसमुक्त हो गया|
