मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत के 11 जहाजों ने होर्मुज पार किया

दुबई: अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हुए ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। इस समझौते के लागू होने के बाद से अब तक भारत से जुड़े 11 बड़े कमर्शियल और व्यापारिक जहाज कच्चे तेल के मुख्य समुद्री मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को सुरक्षित पार कर भारत के लिए रवाना हो चुके हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व

ओमान और ईरान के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग है। वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के व्यापार का लगभग पांचवां (20%) हिस्सा इसी तंग रास्ते से होकर गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल खाड़ी देशों (मिडल-ईस्ट) से इसी मार्ग के जरिए आयात करता है।

भारत के लिए क्यों है यह बड़ी राहत?

  • सप्लाई चेन हुई सुरक्षित: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से जारी सैन्य तनाव के कारण इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हमले और उन्हें बंधक बनाए जाने का खतरा काफी बढ़ गया था। इस नए समझौते से भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को स्थिरता मिली है।

  • मालभाड़े और बीमा में कमी: तनाव कम होने से समुद्री जहाजों के लिए युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम (War-Risk Insurance Premium) और मालभाड़े की दरों में कमी आएगी, जिसका सीधा फायदा भारतीय तेल कंपनियों और अंततः उपभोक्ताओं को मिल सकता है।

इस समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियां एक बार फिर पूरी रफ्तार से बहाल हो रही हैं।

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