12 साल से बेटियों को छुट्टी के बाद भी पढ़ा रहा सरकारी शिक्षक, आपको भावुक कर देगी वजह

सरकारी शिक्षक, यह शब्‍द सुनते ही लोग पैसा ज्‍यादा और काम कम की बात करने लगते हैं। सरकारी स्‍कूलों का परिणाम जब कम आता है तो यह बात और भी हवा पकड़ जाती है। मगर फतेहाबाद जिले में कार्यरत एक ऐसे शिक्षक हैं जो स्‍कूल टाइम में ही नहीं बल्कि स्‍कूल की छुट्टी होने के बाद भी बेटियों को निशुल्‍क पढ़ा रहे हैं।

टोहाना उपमंडल के गांव कन्हड़ी के रहने वाले जलजीत सिंह ऐसे शख्स हैं जो गरीब बेटियों की उम्मीद बन चुके हैं। जलजीत सिंह गेस्ट टीचर (जेबीटी)के तौर पर गांव धारसूल खुर्द के राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। वह प्रतिदिन चार से पांच घंटे अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर बालिकाओं को सशक्त बना रहे हैं। यह सिलसिला 12 वर्षों से निरंतर जारी है। खास बात यह है अवकाश के दिन भी वह विद्यालय में शिक्षा का उजाला प्रकाशित करते हैं। 

छह साल में 18 विद्यार्थियों का नवोदय में हुआ चयन

शिक्षक जलजीत सिंह की मेहनत के फलस्वरूप प्रत्येक वर्ष विद्यालय का परीक्षा परिणाम सौ फीसद रहता है। उल्लेखनीय है कि वह विद्यालय में छुट्टी होने उपरांत ट्यूशन के रूप में चार से पांच घंटे करीब 50 बच्चों को निशुल्क नवोदय की तैयारी करवाते हैं। इसे लेकर विद्यालय की छात्राओं के साथ ही गांव के अन्य बच्चे भी उनके पास नवोदय की पढ़ाई करने आते हैं। गत छह वर्षों में 15 लड़कियों का नवोदय विद्यालय में चयन हुआ है। हाल में भी उनसे शिक्षा ग्रहण कर तीन छात्र भी नवोदय विद्यालय में चयन हुए हैं।

 

मजदूरी करके ग्रहण की शिक्षा

गांव कन्हड़ी निवासी शिक्षक जलजीत सिंह कभी ईंट भट्ठे पर मजदूरी कर जिंदगी बसर करते थे। जलजीत  ने बताया कि पूर्व में उनके पिता ओमप्रकाश ईंट भट्ठे पर मजदूरी कर परिवार की परवरिश करते थे। आय कम होने के चलते वह उचित शिक्षा ग्रहण करने में असंभव थे। इस पर जलजीत ङ्क्षसह द्वारा भी पिता के साथ ही मजदूरी करना शुरू किया। ईंट-भट्ठे पर ईंटें थाप-थाप कर उन्होंने शिक्षा पूरी की। 20 अक्टूबर 2006 को जलजीत सिंह गांव धारसूल खुर्द में राजकीय कन्या माध्यकि विद्यालय में गेस्ट टीचर के तौर पर नियुक्त हुए।

 

पंचायत ने एक्टिवा देकर किया सम्मानित, खुद करते हैं शिक्षा पर खर्च

शिक्षा जगत में उत्कृष्ट कार्य करने पर विगत वर्ष ग्राम पंचायत द्वारा शिक्षक जलजीत ङ्क्षसह को गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में एक्टिवा भेंट कर विशेष रूप से सम्मानित किया गया है। जलजीत सिंह अपने वेतन में से जरूरतमंद छात्राओं को शिक्षा संबंधित सामग्री या पुस्तकें आदि वितरण कर देते हैं। उनका मानना है स्कूल की कोई छात्रा घरेलू स्थिति के चलते सही शिक्षा से अधूरी न रह सके।

 

–गांव के कन्या विद्यालय का समूह स्टाफ मेहनत व लग्न से कार्य कर रहा है। खासकर शिक्षक जलजीत ङ्क्षसह लंबे समय से स्कूल छुट्टी के बाद भी एक्स्ट्रा कक्षाएं लगाकर उन्हें सशक्त बना रहे है। हमें इस पर गर्व है। स्टाफ के कड़ी मेहनत से गांव का विद्यालय न केवल शिक्षा में अव्वल है बल्कि स्वच्छता व सुंदरीकरण में भी अग्रणी है। हाल में विद्यालय द्वारा मुख्यमंत्री सुंंदरीकरण प्रतियोगिता में जिला स्तर पर प्रथम स्थान हासिल किया गया है। स्थिति यह है कि ग्रामीण बच्चों को निजी स्कूल से निकाल कर यहां प्रवेश दिला रहें है। मैंने खुद इससे प्रभावित होकर अपने दो बच्चों को निजी स्कूलों से हटा इस सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाया है।

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