होटल अग्निकांड में 23 की मौत, जांच पर उठ रहे रसूखदार संरक्षण के आरोप

नई दिल्ली: देश की राजधानी के पॉश इलाके मालवीय नगर में स्थित ‘फ्लोरिस स्टे’ होटल में हुए भीषण अग्निकांड की जांच अब विवादों के घेरे में आ गई है। दिल्ली पुलिस द्वारा होटल के 65 वर्षीय रसोइए केशव सिंह नेगी को मुख्य आरोपी बनाकर गिरफ्तार किए जाने के बाद सिविल सोसायटी, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने तीखा विरोध शुरू कर दिया है। लोगों का सीधा आरोप है कि रसूखदार होटल मालिकों, दिल्ली नगर निगम (MCD) के भ्रष्ट इंजीनियरों और स्थानीय पुलिस अधिकारियों को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए एक गरीब और मामूली कर्मचारी को ‘बलि का बकरा’ बनाया जा रहा है।

23 मौतों के बाद भी होटल मालिक और अफसर कार्रवाई से दूर

बीते 3 जून को हुए इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे में एक भारतीय परिवार के 8 सदस्यों समेत नाइजीरिया, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान और इराक जैसे देशों के 15 विदेशी नागरिकों की जान जा चुकी है। इस भयावह त्रासदी में कुल 23 लोगों की मौत हुई है और 30 से अधिक लोग जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। पूर्व चेयरमैन रेणुका गुप्ता सहित कई सामाजिक विचारकों ने सवाल उठाया है कि होटल में अवैध रूप से 20 अतिरिक्त कमरे बने हुए थे और मार्च में इसका लाइसेंस खत्म होने के बाद भी यह धड़ल्ले से चल रहा था। इसके बावजूद बिल्डिंग विभाग के इंजीनियरों और दिल्ली टूरिज्म (DTDC) के जिम्मेदार अफसरों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?

विदेशी मेहमानों के रिकॉर्ड और 'फॉर्म सी' के नियमों में पुलिस की लापरवाही

इस मामले में स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर उंगलियां उठी हैं। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रतिनिधियों के अनुसार, देश के नियमानुसार विदेशी नागरिकों को ठहराने वाले किसी भी होटल या गेस्टहाउस के लिए 24 घंटे के भीतर ‘फॉर्म सी’ (Form C) जमा करना बेहद जरूरी होता है, जिसकी निगरानी की सीधी जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस की होती है। होटल में इतने देशों के विदेशी नागरिक रह रहे थे, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड और सुरक्षा मानकों को लेकर आंखें मूंदे रही। हादसे की रात होटल के सह-मालिक लवकेश बजाज को हिरासत में लिया तो गया, लेकिन बाद में सारा दोष रसोइया केशव नेगी पर मढ़ दिया गया, जो सुरक्षा मानकों की अनदेखी के लिए कतई जिम्मेदार नहीं था।

फायर फाइटिंग नियमों का पालन करने वाले बुजुर्ग को मिली जेल

दिल्ली पुलिस ने रसोइए केशव पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) समेत 5 गंभीर गैर-जमानती धाराएं लगाई हैं, जिसमें 10 साल तक की जेल का प्रावधान है। पुलिस का तर्क है कि केशव ने आग लगते ही बिजली का मुख्य स्विच बंद कर दिया, जिससे अंधेरा होने के कारण लोग फंस गए। हालांकि, सिविल डिफेंस विशेषज्ञों और खुद क्षेत्र के एसडीएम जितेंद्र कुमार ने इस थ्योरी को खारिज करते हुए माना है कि आग लगने के बाद समय पर बिजली बंद होने से ही एक और भी भयानक हादसा टल गया। नियमों के मुताबिक, शॉर्ट सर्किट और आग फैलने से रोकने के लिए सबसे पहला कदम बिजली काटना ही होता है, जिसे समझदारी से निभाने के बावजूद बुजुर्ग कर्मचारी को जेल भेज दिया गया।

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