27 साल से है पवार परिवार का कब्जा

महाराष्ट्र की बारामती लोकसभा सीट राज्य के महत्वपूर्ण संसदीय क्षेत्रों में से एक है. यह कांग्रेस और एनसीपी के गढ़ के रूप में जाना जाता है. इस सीट पर पिछले 27 साल से एनसीपी के मुखिया शरद पवार के परिवार का कब्जा है. यहां से शरद पवार सहित उनकी बेटी और भतीजा अजीत पवार जीत हासिल कर चुके हैं. ऐसे में इस बार बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के आगे इस विजयरथ को रोकने की चुनौती है, वहीं एनसीपी के सामने अपने गढ़ को बचाए रखने का दबाव है.
इस सीट का इतिहास देखें तो 1952 से यहां कांग्रेस का कब्जा रहा है. 1957 में कांग्रेस के केशवराव जेढ़े ने जीत हासिल की. इसके बाद 1960 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस की ही टिकट पर गुलाबराव जेढ़े जीते. गुलाबराव 1962 में भी दोबारा सांसद बने. 1971 तक यह सीट कांग्रेस के पास रही लेकिन 1977 के चुनाव में भारतीय लोकदल ने चुनाव जीता. 1989 से फिर यहां कांग्रेस का राज आ गया. 1991 में उम्मीदवार अजीत पवार रहे और चुनाव जीते. 1991 में उपचुनाव के बाद फिर यह सीट शरद पवार के हिस्से में आ गई और 2004 तक उन्हीं के पास रही. इस दौरान शरद पवार एनसीपी का गठन कर चुके थे.
सुप्रिया सुले तीसरी बार यहां से चुनाव मैदान में हैं. सुप्रिया सुले तीसरी बार यहां से चुनाव मैदान में हैं.
2009 और 2014 में यहां से शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने एनसीपी की टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत गईं. यह एक हाईप्रोफाइल सीट बन चुकी है. ऐसे में इस बार के चुनावों में अन्य पार्टियों के सामने इस सीट को पवार परिवार से छुड़ाने की चुनौती है. 2019 लोकसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने अपने-अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं. वहीं यहां तीसरे चरण में 23 मई को मतदान भी हो चुका है. 23 मई को चुनाव परिणाम आना है.
महाराष्ट्र की कुल 48 लोकसभा सीटों पर 4 चरणों में मतदान हुआ है. 6 चरणों की वोटिंग पूरी हो चुकी है. महाराष्ट्र की बारामती सीट पर तीसरे चरण में 23 अप्रैल को वोट डाले गए. चुनाव आयोग से मिले आंकड़ों के अनुसार इस संसदीय सीट पर 61.58% मतदान दर्ज किया गया. जबकि 2014 के आम चुनाव में यहां 58.83% मतदान हुआ था. वहीं महाराष्ट्र में 62.07% मतदान दर्ज किया गया.
कौन हैं 2019 लोकसभा प्रत्याशी?
2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से एक बार फिर एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले चुनावी मैदान में ताल ठोक रही हैं. वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से कांचन राहुल कूल को टिकट दी गई है. वंचित बहुजन आघाड़ी की ओर से पादलकर नवनाथ को मैदान में उतारा गया है. सपा-बसपा गठबंधन में से बहुजन मुक्ति पार्टी ने संजय शिंदे को उम्मीदवार बनाया है. इन सभी के अलावा बारामती लोकसभा सीट से चुनावी रण के लिए कुल 18 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं, जिनमें 10 निर्दलीय प्रत्याशी भी शामिल हैं.
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बीजेपी-शिवसेना इस सीट को कब्जाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही हैं. बीजेपी-शिवसेना इस सीट को कब्जाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही हैं.
2014 में मोदी लहर में भी नहीं जीती बीजेपी
पिछले लोकसभा चुनाव में बारामती लोकसभा सीट से शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने जीत हासिल की. 2014 में देश भर में मोदी लहर थी, इसके बावजूद सुप्रिया सुले ने 5,21,562 वोट हासिल किए और आरएसपीएस के महादेव जगन्नाथ को 4,51,843 वोट मिले. वहीं 26,396 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी का प्रत्याशी रहा.
2009 के चुनाव देखें तो एनसीपी के टिकट पर सुप्रिया सुले ने 4,87,827 वोट हासिल किए. जबकि प्रतिद्वंदी बीजेपी नेता कांता नलवाडे को 1,50,996 वोट मिले.
सामाजिक ताना-बाना
बारामती संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 6 सीटें आती हैं. इनमें इंदापुर और बारामती में एनसीपी, पुरंदर में शिवसेना, भोर में कांग्रेस और खड़कवासला में बीजेपी विधायक हैं.
