74% महाराष्ट्र सूखे की चपेट में, किसानों को संभालने के लिए बेटे रह रहे साथ

मुंबई| महाराष्ट्र में मानसून की बेरुखी और मूसलाधार बारिश की कमी के चलते राज्य के अधिकांश हिस्सों में सूखे का एक बहुत बड़ा और गंभीर संकट खड़ा हो गया है. स्थिति की भयावहता को देखते हुए सरकार ने प्रदेश के कुल 358 में से 265 तालुकाओं को आधिकारिक तौर पर सूखा प्रभावित घोषित कर दिया है, जो कि पूरे राज्य का लगभग 74 प्रतिशत हिस्सा है. बारिश न होने के कारण खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह से तबाह हो चुकी हैं, जिससे अन्नदाताओं के सामने रोजी-रोटी और जीवनयापन का गहरा संकट उत्पन्न हो गया है.

महाराष्ट्र के 74 फीसदी हिस्से में सूखे का गंभीर संकट

सूखा प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के बाद प्रशासन और सरकार के सामने किसानों की बदहाली की दर्दनाक तस्वीरें सामने आ रही हैं. हालात इतने ज्यादा बदतर हो चुके हैं कि कई जगहों पर किसानों के बेटों को अपने बुजुर्ग पिताओं के साथ साए की तरह रहना पड़ रहा है, ताकि वे निराशा के आगोश में आकर कोई कठोर कदम न उठा सकें. लातूर जिले में कर्ज के भारी दबाव और फसल बर्बाद होने से परेशान होकर एक 33 वर्षीय किसान द्वारा आत्महत्या किए जाने की हृदयविदारक घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया है.

कम बारिश और कर्ज के जाल में फंसे किसानों की दुर्दशा

आंकड़ों के अनुसार इस साल मानसून सीजन के दौरान महाराष्ट्र में सामान्य से करीब 18.8 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे किसानों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. एक जून से 18 सितंबर के बीच राज्य में मात्र 755.9 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि सामान्य रूप से यह आंकड़ा 932.3 मिलीमीटर होना चाहिए था. मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में किसानों की आत्महत्या के आंकड़े लगातार डरा रहे हैं, और ऊपर से कागजी औपचारिकताओं के चलते पीड़ित परिवारों तक सरकारी सहायता समय पर नहीं पहुंच पा रही है.

पेयजल और पशुओं के चारे का संकट हुआ गहरा

फसलें चौपट होने के साथ-साथ सूखे ने ग्रामीण आबादी और मवेशियों के लिए पीने के पानी का गंभीर संकट भी पैदा कर दिया है. प्रभावित इलाकों के किसानों और ग्रामीणों का कहना है कि अब उनके लिए सामान्य जीवन चलाना और परिवार का भरण-पोषण करना असंभव सा हो गया है. स्थानीय किसानों ने सरकार से मांग की है कि स्थिति का तत्काल जायजा लेकर राहत कार्यों में तेजी लाई जाए और पशुओं के लिए तुरंत चारा शिविर स्थापित किए जाएं ताकि इस आपदा से कुछ राहत मिल सके.

केंद्र सरकार की तरफ से किसानों को हरसंभव मदद का भरोसा

इस राष्ट्रीय आपदा और विकट परिस्थिति के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आश्वासन दिया है कि केंद्र सरकार सूखे और बाढ़ से प्रभावित किसानों की हरसंभव मदद के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. प्रभावित जिलों के लिए विशेष आकस्मिक योजनाएं तैयार की गई हैं, और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा कम पानी में उगने वाली और कम अवधि की फसलों के विकल्प सुझाए जा रहे हैं ताकि किसानों को भविष्य में इस तरह के संकट से बचाया जा सके.

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