भोपाल के रहवासी इलाकों में 750 संस्थान निशाने पर, 3 दिन में कार्रवाई संभव

भोपाल। राजधानी के रिहायशी क्षेत्रों में अवैध रूप से संचालित हो रहे कमर्शियल संस्थानों के खिलाफ नगर निगम ने अब सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। निगम प्रशासन ने 750 से अधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अपनी गतिविधियां पूरी तरह बंद करने के लिए तीन दिनों की अंतिम समय-सीमा निर्धारित की है। मंगलवार से संबंधित संचालकों को अंतिम चेतावनी पत्र भेजे जाएंगे, जिसके बाद समयावधि समाप्त होते ही संस्थानों को सील करने और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

750 से अधिक संस्थानों को अंतिम अल्टीमेटम

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, रिहायशी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक उपक्रमों पर की जा रही कार्रवाई अब निर्णायक मोड़ पर आ गई है। आगामी तीन दिनों में सैकड़ों मामलों में तय मियाद पूरी होने वाली है। उपायुक्त ने स्पष्ट किया है कि अंतिम नोटिस जारी होने के बाद भी यदि संस्थानों में काम-काज जारी पाया गया, तो बिना किसी पूर्व सूचना के कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।

अरेरा कॉलोनी, बावड़िया कलां और रोहित नगर के संस्थान भी निशाने पर

निगम की ओर से अरेरा कॉलोनी, बावड़िया कलां और रोहित नगर जैसे प्रमुख क्षेत्रों के 429 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को पहले ही कारण बताओ नोटिस थमाए जा चुके हैं। इनमें से कई संचालकों को 24 घंटे का अंतिम अल्टीमेटम भी दिया गया था। यद्यपि लगभग 250 से अधिक कारोबारियों ने व्यावसायिक कर भुगतान और कमर्शियल बिजली कनेक्शन का हवाला देते हुए अपना पक्ष रखा है, लेकिन निगम नियमों के उल्लंघन को लेकर सख्त बना हुआ है। अब तक शहर भर में 6,500 से ज्यादा नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

कार्रवाई के विरोध में सड़कों पर उतरेंगे व्यापारी

नगर निगम की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के विरोध में स्थानीय व्यापारी एकजुट होने लगे हैं। कारोबारियों ने मंगलवार को रोशनपुरा चौराहे से विशाल विरोध रैली निकालने का निर्णय लिया है। व्यापारी वर्ग का कहना है कि एक साथ इतने बड़े पैमाने पर प्रतिष्ठान बंद कराने से न सिर्फ दुकानदारों बल्कि उनसे जुड़े हजारों कर्मचारियों और छोटे श्रमिकों की आजीविका पर गहरा संकट मंडराने लगेगा।

गुजरात मॉडल पर नियमितीकरण नीति की मांग

कारोबारियों ने सरकार और नगर निगम प्रशासन से कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाकर बीच का रास्ता निकालने की अपील की है। व्यापारियों की मुख्य मांग है कि गुजरात की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी अनाधिकृत निर्माणों व व्यावसायिक गतिविधियों को नियमित करने का कानून बनाया जाए। इसके साथ ही, भोपाल के लगातार बढ़ते दायरे को ध्यान में रखते हुए नया मास्टर प्लान शीघ्र लागू करने की मांग भी उठाई गई है।

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