भारत की तीसरी आंख बनेगा नया सैटेलाइट,12 को होगा लॉन्च 

नई दिल्ली । भारत की सुरक्षा और चौकसी में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की अहम भूमिका लगातार जारी है। इसरो इस साल की तीसरी तिमाही में ऐसा सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है जो देश के जमीनी विकास और आपदा प्रबंधन के लिए मददगार साबित होगा। ये सैटेलाइट सीमा की सुरक्षा के लिए काम आएगा। ये एक अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट है जो सिर्फ और सिर्फ भारत की जमीन और उसके सीमाओं पर अंतरिक्ष से नजर रखेगा। इस जियो-इमेजिंग सैटेलाइट का नाम है ईओएस-3/जीआईसेट-1 (अर्थ ओब्जरवेशन सेटेलाइट-3/ जियोसिन्क्रोनस सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल एफ10)। 
विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि  इस सैटेलाइट की लॉन्चिंग 2021 की तीसरी तिमाही में किया जाएगा। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह प्राकृतिक आपदाओं और मौसम संबंधी रियल टाइम जानकारी देगा। यह पूरे देश पर दिनभर में 4 से 5 बार तस्वीरें लेने में सक्षम हैं। इसके अलावा यह सैटेलाइट जलीय स्रोतों, फसलों, जंगलों में बदलाव आदि की भी पूरी जानकारी देगा। हालांकि, इसरो सूत्रों के हवाले से इस सैटेलाइट की लॉन्चिंग 12 अगस्त या उसके आसपास हो सकती है।
ईओएस-3/जीआईसेट-1 की लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा द्वीप पर स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से की जाएगी। लॉन्चिंग के लिए जीएसएलवी-एमके2 रॉकेट का उपयोग किया जाएगा। रॉकेट ईओएस-3/जीआईसेट-1 सैटेलाइट को जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। जहां पर ये 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर धरती का चक्कर लगाता रहेगा। लॉन्चिंग मौसम या तकनीकी बाधा आने पर टाली भी जा सकती है। 
जीएसएलवी-एमके2 रॉकेट से पहली बार ओजाइव शेप्ड पेलोड फेयरिंग (ओपीएलएफ) सैटेलाइट को छोड़ा जाएगा। यानी ईओएस-3/जीआईसट-1 सैटेलाइट ओपीएलएफ कैटेगरी में आता है। इसका मतलब ये है कि सैटेलाइट 4 मीटर व्यास के मेहराब जैसा दिखाई देगा। इसरो सूत्रों की माने तो ये स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन से लैस रॉकेट की आठवीं उड़ान होगी। जबकि जीएसएलवी रॉकेट की 14वीं उड़ान। 
लॉन्च के 19 मिनट के अंदर ईओएस-3/जीआईसेट-1 सैटेलाइट अपने निर्धारित कक्षा में तैनात कर दिया जाएगा। इस सैटेलाइट की खास बात हैं इसके कैमरे। इस सैटेलाइट में तीन कैमरे लगे हैं। पहला मल्टी स्पेक्ट्रल विजिबल एंड नीयर-इंफ्रारेड (6 बैंड्स), दूसरा हाइपर-स्पेक्ट्रल विजिबल एंड नीयर-इंफ्रारेड (158 बैंड्स) और तीसरा हाइपर-स्पेक्ट्रल शॉर्ट वेव-इंफ्रारेड (256 बैंड्स)। पहले कैमरे का रेजोल्यूशन 42 मीटर, दूसरे का 318 मीटर और तीसरे का 191 मीटर। यानी इस आकृति की वस्तु इस कैमरे में आसानी से कैद हो जाएगी। 
विजिबल कैमरा यानी दिन में कान करने वाला कैमरा जो सामान्य तस्वीरें खीचेंगा। इसके अलावा इसमें इंफ्रारेड कैमरा भी लगा है। जो रात में तस्वीरें लेगा। यानी भारत की सीमा पर किसी तरह की गतिविधि हुई तो ईओएस-3/जीआईसेट-1 सैटेलाइट के कैमरों की नजर से बचेगी नहीं। ये किसी भी मौसम में तस्वीरें लेने के लिए सक्षम है। इसके अलावा इस सैटेलाइट की मदद से आपदा प्रबंधन, अचानक हुई कोई घटना की निगरानी की जा सकती है। साथ ही साथ कृषि, जंगल, मिनरेलॉजी, आपदा से पहले सूचना देना, क्लाउड प्रॉपर्टीज, बर्फ और ग्लेशियर समेत समुद्र की निगरानी करना भी इस सैटेलाइट का काम है।

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