जीएसटी अधिकारी1 जनवरी से कारोबारियों के खिलाफ वसूली की सीधी कार्रवाई कर सकेंगे

 

जो कारोबारी जीएसटी के मासिक रिटर्न जीएसटीआर-1 में अधिक बिक्री और टैक्स भुगतान के समय जीएसटीआर-3बी में कम बिक्री दिखाते हैं, उनके लिए दिक्कतें बढ़ने वाली हैं। जीएसटी अधिकारी पहली जनवरी से ऐसे कारोबारियों के खिलाफ वसूली की सीधी कार्रवाई कर सकेंगे। जीएसटी अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ समय के दौरान ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें विक्रेताओं ने जीएसटीआर-1 में इसलिए अधिक बिक्री दिखाई ताकि खरीदार ज्यादा इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का दावा कर सकें। लेकिन जब जीसएटी देनदारी की बारी आई तो उन्होंने जीएसटीआर-3बी में कम बिक्री दिखाई। नए कदम से बिलिंग में इस फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी।

जीएसटी कानून के तहत अब तक की प्रक्रिया में पहले ऐसे कारोबारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता था। उनसे संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने के बाद अधिकारी जीएसटी वसूली की प्रक्रिया शुरू करते थे। लेकिन फर्जीवाड़े की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने फाइनेंस एक्ट में इस वर्ष संशोधन किया। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआइसी) ने मंगलवार को यह अधिसूचना जारी कर दी कि संशोधन का यह प्रविधान अगले वर्ष पहली जनवरी से अस्तित्व में आ जाएगा।

इसमें प्रविधान में कहा गया है कि जहां कहीं भी कारोबारी स्व–मूल्यांकन के आधार पर टैक्स भरते हैं, वहां इस तरह का अंतर पाए जाने पर जीएसटी अधिकारी सीधी कार्रवाई कर सकेंगे।इस बारे में एएमआरजी एंड एसोसिएट्स के सीनियर पार्टनर रजत मोहन ने कहा कि यह कारोबारियों को परेशान करने वाला संशोधन है। इसके तहत अब इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-3बी में किस कारण से अंतर है। अगर यह कारण परिस्थितिजन्य भी हो, तब भी जीएसटी अधिकारियों को सीधी वसूली का अधिकार दे दिया गया है।

 

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