सचिन पायलट ने 2 मिनट में बांधा 51 मीटर लंबा साफा

 टोंक. सचिन पायलट (Sachin Pilot) का उनके विधानसभा क्षेत्र टोंक में अब तक का सबसे बड़ा स्वागत सत्कार किया गया. यहां पूर्व पीसीसी चीफ एवं स्थानीय विधायक सचिन पायलट के 51 मीटर लंबा साफा (Safa) बांधा गया. यह साफा पायलट ने खुद बांधा. इस दौरान वे थक गये तो दो बार रुके भी लेकिन उन्होंने 51 मीटर के इस साफे को बांधकर ही दम लिया. बाद में उन्होंने इस साफे को एक कार्यकर्ता को पहना दिया. पायलट तेजी से साफा बांधने के लिये देशभर में जाने जाते हैं. सचिन पायलट सामान्य साफा सिर्फ 29 सैकेंड में बांध लेते हैं. 51 मीटर लंबा साफा बांधने में पायलट को करीब 2 मिनट का समय लगा.

दरअसल पायलट रविवार को अपने विधानसभा क्षेत्र टोंक में थे. इस दौरान उन्होंने क्षेत्र के पांच-छह गावों में जनसुनवाई की. इस दौरान वे जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूरी सवाई माधोपुर रोड पर स्थित घास गांव पहुंचे. वहां घास सरपंच ने उनको 51 मीटर लंबा का साफा भेंट किया. पायलट ने फिर इस साफे को बांधना शुरू किया. इसके लिये एक दो कार्यकर्ता साफे को सीधा करते रहे पायलट उसे अपने सिर पर बांधते रहे. लेकिन साफा 51 मीटर लंबा होने के कारण जल्दी से बंध नहीं पाया. लेकिन पायलट ने भी हार नहीं मानी.

पायलट की साफा बांधने की स्पीड काफी तेज है
पायलट तेजी के साथ साफे को बांधते रहे. इस दौरान दो बाद वे थककर रुक गये और उन्होंने कार्यकर्ताओं से इसे लेकर हंसी मजाक भी किया. बाद में वे पूरे साफे को बांधकर ही माने. पायलट ने साफे को बांधने के बाद अपने एक कार्यकर्ता के सिर पर रख दिया. पायलट खुद ही बढ़िया साफा बांधते हैं. इसके लिये वे कई बार चर्चा में आ चुके हैं. पायलट की साफा बांधने की स्पीड भी काफी तेज है.

सचिन पायलट ने इन गावों में सुनी जनसमस्यायें
पायलट इससे सबसे पहले चंदलाई ग्राम पंचायत के रुस्तमगंज गांव पहुंचे और लोगों की समस्याओं को जाना. यहां उन्होंने ग्रामीणों की डिमांड पर बस स्टेशन और स्वास्थ्य केंद्र बनाने की घोषणा की. स्कूल का जीर्णोद्धार कराने का आश्वासन दिया. यहां के बाद पायलट लवादर, घास, काबरा और सोनवा समेत कई गांवों में पहुंचे और लोगों की समस्याओं को सुना.

पायलट ने केन्द्र सरकार पर साधा निशाना
मीडिया से बातचीत करते हुए पायलट ने केन्द्र सरकार पर महंगाई, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दे पर निशाना साधा. पायलट ने कहा कि महंगाई इतनी बढ़ गई कि उससे आमजन त्रस्त है. इसका खामियाजा केन्द्र सरकार को भुगतना पड़ेगा. बीजेपी की आक्रोश रैली के सवाल पर कहा कि बीजेपी में सभी अपने आपको मुख्यमंत्री का दावेदार मान चुके है. वह सभी उपचुनाव हार चुकी है. बीजेपी राज्य में विपक्ष की भूमिका भी नहीं निभा पा रहीं है.

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