तीन बार चुनाव हारे नेता पर कांग्रेस ने खेला दाव

जबलपुर । कभी कांग्रेस का गढ़ रही मंडला संसदीय सीट इस बार फिर सुर्खियों में है। जहां भाजपा ने अपने पुराने चेहरे फग्गन सिंह कुलस्ते को मैदान में उतारा है वहीं कांग्रेस ने यहां तगड़ा दाव खेला है। कांग्रेस ने यहां से कमल मरावी को उम्मीदवार बनाया है। कमल मरावी गोंगपा के टिकट पर तीन बार विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। आदिवासी वोट बैंक पर कमल मरावी की तगड़ी पकड़ मानी जाती है। वे गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। तीन साल पहले ही उनने कांग्रेस का हाथ थामा था। 
कमल मरावी की तगड़ी पकड़ बिछिया विधानसभा क्षेत्र में है। वे यहां से तीन बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। हालाकि उन्हें जीत नसीब नहीं हुई, लेकिन उन्होंने भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के लिए मुसीबतें खड़ी कर दीं। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में इस सीट से कंाग्रेस प्रत्याशी नारायण सिंह पट्टा चुनाव जीते हैं। माना जा रहा है कि कमल मरावी के सहयोग के कारण उनकी जीत हुई थी। बतौर ईनाम के रूप में कमल मरावी को लोकसभा का प्रत्याशी बनाया गया है।
डिंडौरी और मंडला निर्णायक
मंडला संसदीय क्षेत्र के लिए डिंडौरी और मंडला के वोटर अहम रोल अदा करते हैं। इन क्षेत्रों में गोंगपा काफी मजबूत मानी जाती है। यदि कमल गोगंपा के इन वोटरों को साधने में कामयाब हुए तो उन्हें जीत मिल सकती है। फिलहाल कमल का मुकाबला भाजपा के दिग्गज नेता फग्गन सिंह से है। यहां मुकाबला बड़ा रोचक होने की उम्मीद लगाई जा रही है। 
फग्गन का रास्ता आसान नहीं 
भाजपा के मौजूदा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते एक बार फिर मैदान में हैं। वे आदिवासी वोट बैंक को साधकर लंबे समय से जीत सुनिश्चित करते आए हैं, लेकिन 2019 में इस प्रदर्शन को दोहरा पाना कुलस्ते के लिए आसान नहीं होगा। मंडला सीट पर बीते ढाई दशक से भाजपा का कब्जा है। वर्ष 2009 के चुनाव को छोड़ दें तो कुलस्ते के सहारे ही ये सीट भाजपा के पास है। कुलस्ते की जीत में हमेशा गोंगपा की अहम भूमिका रही है, जिसके पास इस इलाके का बड़ा आदिवासी वोट बैंक है। 
कांग्रेस हुई मजबूत
मंडला संसदीय क्षेत्र में मंडला जिले की 3, डिंडोरी जिले की 2, सिवनी जिले की 2, नरसिंहपुर जिले की एक विधानसभा सीट आती है। फिलहाल कांग्रेस के पास ८ में से ६ सीटें हैं। विस चुनाव में फग्गन सिंह कुलस्ते के छोटे भाई रामप्यारे कुलस्ते भी चुनाव हार गए थे। ऐसे में यह तय करना मुश्किल है कि लोकसभा चुनाव में किसकी जीत होगी। यह भी कहा जा रहा है कि मंडला-जबलपुर रोड नहीं बनने के कारण जनता में मौजूदा सांसद के खिलाफ नाराजगी है। वहीं सिवनी में प्रचार के दौरान भी कुलस्ते को विरोध का सामना करना पड़ा था। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस सीट से कौन मैदान मारता है।

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